ईयू के साथ एफटीए में भारतीय निर्यात को प्राथमिकता मिलना एक बड़ा गेम चेंजर : इंडस्ट्री

ईयू के साथ एफटीए में भारतीय निर्यात को प्राथमिकता मिलना एक बड़ा गेम चेंजर : इंडस्ट्री


नई दिल्ली, 27 जनवरी। ईयू के साथ एफटीए में भारतीय निर्यात को प्राथमिकता मिलना एक गेम चेंजर है। यह जानकारी भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की ओर से मंगलवार को दी गई।

भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) एफटीए से देश के लिए 75 अरब डॉलर (6.41 लाख करोड़ रुपए) के निर्यात के अवसर खुले हैं, जिसमें कपड़ा, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में 33 अरब डॉलर के निर्यात को एफटीए के तहत प्राथमिकता मिलने से भारी लाभ होने वाला है।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी के अनुसार, यह ऐतिहासिक समझौता भारत की वैश्विक व्यापार भागीदारी में एक रणनीतिक सफलता है और दो प्रमुख लोकतांत्रिक देशों और अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझेदारी को काफी मजबूत करता है, जिनकी संयुक्त रूप से वैश्विक जीडीपी में हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है।

बनर्जी ने कहा, “यह समझौता यूरोपीय संघ के उच्च-मूल्य वाले बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता क्षमता को निर्णायक रूप से बढ़ाता है, भारतीय निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में और अधिक मजबूती से स्थापित करता है, और निवेश, प्रौद्योगिकी प्रवाह और विस्तार को गति प्रदान करता है।”

सीआईआई ने कहा कि श्रम-प्रधान क्षेत्रों और लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए ठोस लाभ प्रदान करके और भारतीय प्रतिभा के लिए भविष्य के अनुकूल गतिशीलता ढांचा सक्षम करके, यह समझौता सतत, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विकास की नींव रखता है, जो 2047 तक विकसित भारत के सरकार के दृष्टिकोण के साथ पूरी तरह से मेल खाता है।

फिक्की के प्रेसिडेंट अनंत गोयनका ने कहा, “यूरोपीय संघ भारत के हालिया मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के अंतर्गत आने वाला सबसे विशाल और उच्च क्षमता वाला बाजार है, जो गहन आर्थिक सहयोग के नए द्वार खोलता है। इससे विनिर्माण और उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में व्यापक बाजार पहुंच, मजबूत मूल्य श्रृंखला एकीकरण और निर्यात प्रतिस्पर्धा में वृद्धि संभव होगी।”

पीएचडीसीसीआई के सीईओ और महासचिव डॉ. रणजीत मेहता ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए एफटीए से अगले पांच वर्षों (एफटीए लागू होने के बाद) में भारत के ईयू को निर्यात में 35-45 प्रतिशत तक की वृद्धि देखने को मिल सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि इस समझौते से दवाइयों के क्षेत्र में 8-12 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज होने की उम्मीद है, साथ ही इंजीनियरिंग उत्पादों, जिनमें विद्युत मशीनरी और औद्योगिक उपकरण शामिल हैं, में यूरोपीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में गहन एकीकरण के साथ 7-10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हो सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि शुल्क में कमी, निवेश संरक्षण और भौगोलिक संकेत मान्यता का संयोजन भारत को केवल मात्रा के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने के बजाय मूल्य निर्माता के रूप में पुनः स्थापित करेगा।
 
Similar content Most view View more

Latest Replies

Forum statistics

Threads
16,711
Messages
16,748
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top