पाकिस्तान: बीएलएफ प्रमुख ने बलूचिस्तानी सीएम पर लगाया 'कठोर हिरासत कानून' लागू करने का आरोप

पाकिस्तान: बीएलएफ प्रमुख ने बलूचिस्तानी सीएम पर लगाया 'कठोर हिरासत कानून' लागू करने का आरोप


क्वेटा, 27 जनवरी। बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) के प्रमुख अल्लाह नजर बलूच ने बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती पर “कठोर और दमनकारी हिरासत कानून” लागू करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि प्रांत में पाकिस्तानी कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा औसतन रोज़ाना पांच लोगों का अपहरण कर उन्हें जबरन गायब किया जा रहा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर साझा एक बयान में अल्लाह नजर बलूच ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और वैश्विक बुद्धिजीवियों से बलूचिस्तान में कथित तौर पर हो रहे बलूच लोगों के “नरसंहार” के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।

उन्होंने लिखा, “कब्जे वाले बलूचिस्तान का कठपुतली मुख्यमंत्री अपने आकाओं की सलाह पर एक दमनकारी हिरासत कानून लेकर आया है। मैं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अपील करता हूं कि वे इस अत्याचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें।”

अल्लाह नजर बलूच ने आगे आरोप लगाया, “ये हिरासत केंद्र नाजी यातना शिविरों की याद दिलाते हैं। पाकिस्तान की कानून प्रवर्तन एजेंसियां औसतन रोज पांच लोगों का अपहरण कर उन्हें गायब कर रही हैं। ‘मारो और फेंको’ की नीति को इस दुष्ट राज्य ने बलूचिस्तान में और तेज कर दिया है।”

बीएलएफ प्रमुख ने बलूच सांसदों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और कहा कि अन्याय के समय मौन रहना भी अपराध में भागीदारी के समान है। उन्होंने बलूच स्वतंत्रता आंदोलन को “वैध” बताते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों और सिद्धांतों के अनुरूप है।

उन्होंने कहा, “मैं उन बलूच सांसदों से भी कहना चाहता हूं जो खुद को अहिंसक बताते हैं। यदि ऐसा है, तो राज्य द्वारा की जा रही इन बर्बर कार्रवाइयों पर उनकी ओर से पूर्ण चुप्पी क्यों है? अन्याय के समय चुप रहना, अन्याय में साझेदार बनना है। दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र अब भी मौजूद है और उस पर नैतिक व कानूनी जिम्मेदारी है।”

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और वैश्विक बुद्धिजीवियों से बलूच राष्ट्र के खिलाफ कथित नरसंहार पर खुलकर बोलने की अपील दोहराई। उन्होंने कहा कि इतिहास उन लोगों का फैसला करेगा जो उत्पीड़न के खिलाफ खड़े हुए और उन लोगों का भी, जिन्होंने आंखें मूंद लीं।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि विवादित मुख्यमंत्री सरफराज बुगती के नेतृत्व वाली बलूचिस्तान प्रांतीय सरकार द्वारा ‘बलूचिस्तान प्रिवेंशन, डिटेंशन एंड डि-रेडिकलाइजेशन रूल्स 2025’ को मंजूरी देना, प्रांत में जबरन गायब किए जाने की घटनाओं को कानूनी जामा पहनाने का प्रयास है।

इस सप्ताह की शुरुआत में मुख्यमंत्री बुगती की अध्यक्षता में बलूचिस्तान प्रांतीय कैबिनेट की बैठक हुई थी। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेतृत्व वाली इस सरकार की बैठक में एक विवादास्पद फैसला लिया गया। ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ ने अपने एक संपादकीय में विश्लेषण करते हुए कहा कि इस फैसले के तहत जबरन गायब किए गए लोगों को ‘संदिग्ध’ घोषित कर हिरासत केंद्रों में रखने और आतंकवाद निरोधक विभाग (सीटीडी) के पुलिस अधिकारियों की निगरानी में उनसे पूछताछ करने की व्यवस्था की गई है।

संपादकीय में कहा गया, “पाकिस्तान की शक्तिशाली संस्थाओं के समर्थन से बनी सरकार द्वारा ‘बलूचिस्तान प्रिवेंशन, डिटेंशन एंड डि-रेडिकलाइजेशन रूल्स 2025’ को मंजूरी देना, बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने की घटनाओं को वैध बनाने की कोशिश है। इसका उद्देश्य जबरन गुमशुदगी और राज्य दमन के खिलाफ बढ़ते आंदोलन को कुचलना और पीड़ित परिवारों की आवाज़ दबाना प्रतीत होता है। जबरन गायब किए गए लोगों को अदालत में पेश करने के बजाय हिरासत केंद्रों में ‘संदिग्ध’ बताकर पूछताछ करना, पाकिस्तान के संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक मानवाधिकारों के सीधे तौर पर खिलाफ है।”
 
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