कमजोर वर्ग से भेदभाव को जन्मसिद्ध अधिकार मानने वालों को यूजीसी से परेशानी: चंद्रशेखर आजाद

कमजोर वर्ग से भेदभाव को जन्मसिद्ध अधिकार मानने वालों को यूजीसी से परेशानी: चंद्रशेखर आजाद


नई दिल्ली, 27 जनवरी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से लागू किए गए 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026' पर विवाद बढ़ रहा है। भीम आर्मी के प्रमुख और आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि जिन लोगों को लगता था कि कमजोर वर्ग के बच्‍चों से भेदभाव करना उनका जन्‍मसिद्ध अधिकार है, उन्हीं लोगों को दिक्‍कत हो रही है।

यूजीसी के नए एक्ट के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन, बढ़ते विवाद और इस्तीफों को लेकर चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि आज भी एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोग देश में सबसे ज्यादा शोषण झेल रहे हैं। टैक्स भी दे रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को लेकर कोई गंभीरता से बात नहीं करता।

भीम आर्मी के प्रमुख ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें ऐसा कोई ठोस विरोध प्रदर्शन दिखाई नहीं दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी नीति के खिलाफ वास्तविक विरोध तब माना जाता है, जब उसे बनाने में शामिल लोगों के घरों या कार्यालयों के बाहर धरना-प्रदर्शन हो, लेकिन मौजूदा समय में ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिल रहा है। फिलहाल यह विवाद केवल मीडिया की बहसों तक सीमित है, जबकि जमीनी स्तर पर किसी बड़े आंदोलन या जनआक्रोश के संकेत नहीं हैं।

चंद्रशेखर आजाद ने दावा किया कि यूजीसी की नई गाइडलाइन में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसका विरोध किया जाए। उल्टा, इस गाइडलाइन के उद्देश्यों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को शामिल किया गया है, जिससे ईडब्ल्यूएस वर्ग के बच्चों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी के भीतर सामाजिक न्याय की वास्तविक भावना है, तो वह एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के पक्ष में ही हो सकती है।

चंद्रशेखर आजाद ने यूजीसी नियमों के विरोध को निराधार बताते हुए कहा कि यह कमजोर वर्गों के हित में लाया गया है और इसका विरोध करना सामाजिक न्याय के खिलाफ है। कमजोर वर्ग के लोगों को यह समझने की जरूरत है कि कौन वास्तव में उनके साथ खड़ा है और कौन केवल राजनीतिक स्वार्थ के लिए विरोध कर रहा है।

उन्होंने मौजूदा हालात की तुलना मंडल कमीशन के समय से करते हुए कहा कि जिस तरह उस दौर में सामाजिक न्याय के मुद्दे पर विरोध हुआ था, आज वही स्थिति फिर देखने को मिल रही है। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे विवाद के जरिए उन नेताओं के चेहरे से पर्दा उठ रहा है, जो खुद को दलितों और पिछड़ों का हितैषी बताते रहे हैं, लेकिन अब उनके असली इरादे सामने आ रहे हैं।
 

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