वर्ष 2025 में रक्षा क्षेत्र में हुए व्यापक सुधार, सैन्य क्षमता और आत्मनिर्भरता को मिला बड़ा बढ़ावा

वर्ष 2025 में रक्षा क्षेत्र में हुए व्यापक सुधार, सैन्य क्षमता और आत्मनिर्भरता को मिला बड़ा बढ़ावा


साल 2025 भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष साबित हुआ है, जिसे रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर 'सुधारों का वर्ष' (Year of Reforms 2025) करार दिया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में इस साल सेना को आधुनिक बनाने, तीनों सेनाओं के बीच तालमेल (Jointness) बढ़ाने और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों और बयानों के आधार पर, यहाँ उन प्रमुख सुधारों का विवरण दिया गया है जिन्होंने 2025 में भारत की सैन्य तैयारी को एक नई दिशा दी है:

रक्षा खरीद और बजट का सही उपयोग

भारतीय सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने हेतु सरकार ने अपनी तिजोरी खोल दी है। रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने जनवरी 2025 से अब तक 3.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक के पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है।
  • तेजी से हुए सौदे: वित्त वर्ष 2025-26 में दिसंबर के अंत तक, सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए 1.82 लाख करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट साइन किए जा चुके हैं।
  • बजट का सदुपयोग: मंत्रालय ने दिसंबर 2025 तक अपने कैपिटल एक्यूजीशन बजट (Capital Acquisition Budget) का 80% हिस्सा खर्च कर दिया है, जो यह दर्शाता है कि सेना के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया अत्यंत तीव्र गति से चल रही है।

आत्मनिर्भरता और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी

'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने के लिए रक्षा मंत्रालय ने प्राइवेट सेक्टर के लिए दरवाजे और चौड़े कर दिए हैं। अब रक्षा अनुसंधान एवं विकास (R&D) बजट का 25% हिस्सा प्राइवेट इंडस्ट्री, MSMEs और एकेडमिक संस्थानों के लिए आवंटित किया जा रहा है।
  • लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
  • सरकारी टेस्टिंग लैब्स और ट्रायल इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राइवेट कंपनियों के उपयोग के लिए साझा किया जा रहा है।
  • बाजार की मांग और आपूर्ति को समझने के लिए 'मार्केट इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स' तैयार की जा रही हैं।

प्रक्रियाओं का सरलीकरण और नई नीतियां

लाल फीताशाही को कम करने और निर्णय लेने की क्षमता को तेज करने के लिए 1 नवंबर 2025 से 'रक्षा खरीद नियमावली 2025' (Defence Procurement Manual) लागू की गई है। इसके तहत iDEX मैनुअल और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पॉलिसी को काफी सरल बना दिया गया है। साथ ही, रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक अलग 'एक्सपोर्ट प्रमोशन बॉडी' का गठन भी किया गया है।

तीनों सेनाओं में 'ज्वाइंटनेस' और ऑपरेशन सिंदूर

भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखते हुए तीनों सेनाओं (थल, जल और वायु) के एकीकरण पर विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए 'ज्वाइंट ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर' की स्थापना की गई है और 'विजन 2047' जारी किया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, इन सुधारों का सकारात्मक असर 'ऑपरेशन सिंदूर' की योजना और क्रियान्वयन के दौरान स्पष्ट रूप से देखा गया, जहाँ तीनों सेनाओं ने बेहतरीन तालमेल का प्रदर्शन किया। इसके अलावा, महिलाओं को कॉम्बैट रोल्स और लीडरशिप पदों पर अधिक अवसर दिए गए हैं।

पूर्व सैनिकों का कल्याण: स्पर्श और ईसीएचएस

सेवारत सैनिकों के साथ-साथ पूर्व सैनिकों (Veterans) की सुविधाओं में भी बड़े सुधार किए गए हैं:
  • पेंशन: भारत के सबसे बड़े डिजिटल पेंशन प्लेटफॉर्म 'स्पर्श' (SPARSH) पर अब 31.69 लाख रक्षा पेंशनभोगी जुड़ चुके हैं। पुराने सिस्टम की 6 लाख से अधिक खामियों को दूर किया गया है।
  • स्वास्थ्य: 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग पूर्व सैनिकों के लिए घर पर दवा पहुंचाने (Doorstep delivery) की सुविधा शुरू की गई है। इसके अलावा, ई-सेहत (eSeHAT) के जरिए टेली-मेडिसिन और ईसीएचएस (ECHS) में आयुष (AYUSH) उपचार को भी शामिल किया गया है।
रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि ये सुधार कोई अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि यह भारत को एक सुरक्षित और शक्तिशाली राष्ट्र बनाने की निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
 

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