जबलपुर, 26 जनवरी। मध्य प्रदेश के जबलपुर में निर्माणाधीन रिंग रोड परियोजना के दौरान रविवार रात एक दर्दनाक हादसा हो गया, जिसमें पश्चिम बंगाल के एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए।
यह दुर्घटना उस समय हुई जब निर्माण स्थल पर शटरिंग के काम को सहारा देने वाला मचान लगभग 60 फीट की ऊंचाई से नीचे गिर पड़ा। हादसे के वक्त साइट पर करीब 22 मजदूर काम कर रहे थे, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हादसा भेड़ाघाट क्षेत्र के पास स्थित लालपुर गांव में हुआ, जहां एक फ्लाईओवर का निर्माण कार्य चल रहा है। यह जबलपुर की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है और इसका उद्देश्य शहर के आसपास बढ़ते यातायात दबाव को कम करना है। मचान सीधे उस ढांचे पर काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरा, जिससे वे भारी कंक्रीट के मलबे के नीचे दब गए।
मृतक मजदूर की पहचान पश्चिम बंगाल निवासी मुरसलेम (35) के रूप में हुई है, जबकि घायल मजदूरों में रसाल (22) और राजेश्वर सिंह (21) शामिल हैं। हादसे के तुरंत बाद उनके साथी मजदूर मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद मलबे में दबे तीनों को बाहर निकाला। हालांकि, मलबे के अत्यधिक दबाव और गंभीर चोटों के कारण मुरसलेम ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।
घायल दोनों मजदूरों को गंभीर हालत में तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति नाजुक बताई है। चिकित्सकों के अनुसार, दोनों को कई हड्डियों में फ्रैक्चर, आंतरिक चोटें और सिर में संभावित गंभीर चोटें आई हैं। फिलहाल उन्हें अस्पताल के ट्रॉमा यूनिट में गहन चिकित्सा निगरानी में रखा गया है।
रिंग रोड एक महत्वपूर्ण शहरी विकास परियोजना है, जिसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। इस हिस्से में एलिवेटेड संरचनाओं और बड़े पैमाने पर कंक्रीटिंग का कार्य शामिल है, जिसके चलते ऊंचाई पर शटरिंग और फॉर्मवर्क के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक हो जाता है। बावजूद इसके, इस हादसे ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन ने मचान गिरने के कारणों की तत्काल जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में संरचनात्मक सहारे की मजबूती, उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता और सुरक्षा दिशानिर्देशों के पालन में संभावित लापरवाही की आशंका जताई जा रही है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। श्रम विभाग के अधिकारियों और परियोजना से जुड़े ठेकेदारों को जांच में पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।