पूर्व यूजीसी चेयरमैन जगदेश कुमार और आईआईटी मद्रास के निदेशक कामकोटि को पद्मश्री

पूर्व यूजीसी चेयरमैन जगदेश कुमार और आईआईटी मद्रास के निदेशक कामकोटि को पद्मश्री


नई दिल्ली, 25 जनवरी। राष्ट्रीय स्तर के दो प्रसिद्ध शिक्षाविदों वीझिनाथन कामकोटि और मामिडाला जगदीश कुमार को इस वर्ष पद्मश्री से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। प्रो. वी. कामकोटि आईआईटी मद्रास के निदेशक हैं, वहीं प्रोफेसर जगदीश कुमार यूजीसी के पूर्व चेयरमैन हैं।

प्रोफेसर कामकोटि को विज्ञान और इंजीनियरिंग श्रेणी से पद्मश्री के लिए चुना गया है। वहीं प्रोफेसर जगदेश कुमार को साहित्य और शिक्षा जगत में योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जा रहा है।

पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुने जाने पर आईआईटी के निदेशक प्रो. कामकोटि ने कहा कि यह पुरस्कार उनके लिए एक ही संदेश देता है, कि वे ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के लिए अपनी पूरी क्षमता और पूरे प्रयास समर्पित करेंगे।

उन्होंने कहा कि उनकी उपलब्धियां सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं और यह सम्मान वे उन सभी को समर्पित करते हैं जिन्होंने इस यात्रा में उनका साथ दिया।

इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी जगदेश कुमार और प्रो. वी. कामकोटि को बधाई दी। उन्होंने कहा कि दोनों भारतीय शिक्षा जगत के स्तंभ हैं और शिक्षा परिदृश्य को रूपांतरित करने में उनका योगदान अतुलनीय है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि पद्म सम्मान उनके समर्पण, योगदान और शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को आकार देने में उनके स्थायी प्रभाव की उचित पहचान है। ऐसे बुद्धिजीवी भारत की शान हैं। उनके साथ निकटता से कार्य करना उनके लिए गौरव का विषय है।

उन्होंने राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर शिक्षा को नया रूप देने वाले नायकों को पहचानना और सम्मानित करना सराहनीय है।

प्रो. जगदेश कुमार बीते वर्ष यूजीसी चेयरमैन के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। इससे पहले वह बीते तीन सालों से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के चेयरमैन थे।

प्रोफेसर कुमार के कार्यकाल में यूजीसी ने कई बड़े बदलाव देखे। इनमें विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए पॉलिसी बनाना और विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल रहा। वह भारत को सेमीकंडक्टर्स के क्षेत्र में आगे बढ़ने में भी सहयोग कर रहे हैं। प्रोफेसर कुमार यूजीसी चेयरमैन बनने से पहले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर थे।

उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग से एमएस (ईई) और पीएचडी (ईई) की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने अपना पोस्ट डॉक्टरल शोध वाटरलू, ओंटारियो, कनाडा के वाटरलू विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग में किया। वे आईआईटी दिल्ली में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर भी रहे हैं। वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में जनवरी 2016 से फरवरी 2022 तक विश्वविद्यालय के 12वें कुलपति रहे हैं।

उन्होंने फिलिप्स सेमीकंडक्टर्स, नीदरलैंड द्वारा आईआईटी दिल्ली में स्थापित एनएक्सपी (फिलिप्स) चेयर प्रोफेसर का पद भी संभाला था। उन्हें आईआईटी दिल्ली से 2013 में शिक्षण में उत्कृष्टता के लिए पुरस्कार मिला था। वह नैनोइलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, नैनोस्केल डिवाइस मॉडलिंग और सिमुलेशन, इनोवेटिव डिवाइस डिजाइन और पावर सेमीकंडक्टर डिवाइस के क्षेत्र में काम करते रहे हैं। उन्होंने तीन पुस्तकों, चार पुस्तक अध्यायों और रेफरीड पत्रिकाओं और सम्मेलनों में 250 से अधिक प्रकाशनों के साथ उपरोक्त क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रकाशन किया है। उनके शोध के आधार पर कई पेटेंट आवेदन दायर किए गए हैं। वे आईईईई जर्नल ऑफ द इलेक्ट्रॉन डिवाइसेस सोसाइटी सहित कई अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं के संपादकीय बोर्ड में हैं और आईईटीई टेक्निकल रिव्यू के प्रधान संपादक हैं। वे नौ वर्षों तक आईईईई ट्रांजेक्शन ऑन इलेक्ट्रॉन डिवाइसेस के संपादक रहे।

वहीं, प्रोफेसर कामकोटि के नेतृत्व में आईआईटी मद्रास ने कई कामयाबियां हासिल की हैं। यह संस्थान केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) 2025 में ओवरऑल रैंकिंग व इंजीनियरिंग संस्थानों में पहले स्थान पर है। इसके अलावा कई अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भी आईआईटी मद्रास ने लगातार कई वर्षों से शानदार प्रदर्शन किया है।

आईआईटी मद्रास अपने बेहतरीन रिसर्च वर्क के लिए जाना जाता है। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधुनिक परिवहन व्यवस्थाओं, सैन्य साजोसामान से लेकर नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं पर सफलतापूर्वक कार्य किया जा रहा है।
 
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