नई दिल्ली, 24 जनवरी। देशवासियों के लिए 25 जनवरी को लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत को याद करने का अवसर है। वही ताकत जो यह तय करती है कि पंचायत से लेकर देश की सत्ता पर कौन राज करेगा। इस दिन पूरा देश राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाता है। यह सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे का उत्सव है, जिसके सहारे दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र खड़ा है, हर वोट मायने रखता है।
भारत के गणतांत्रिक बनने से ठीक एक दिन पहले भारत निर्वाचन आयोग का गठन 25 जनवरी 1950 को हुआ। यह संयोग नहीं, बल्कि एक संदेश था कि गणतंत्र की आत्मा तभी जीवित रहेगी जब जनता की आवाज सुनी जाएगी। इसी ऐतिहासिक दिन को यादगार बनाने और चुनावी भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने 2011 से राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाने की परंपरा शुरू की। तब से हर साल यह दिन नागरिकों को उनके अधिकार और कर्तव्य—दोनों की याद दिलाता है।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में नागरिक लोकतंत्र के प्रति अपनी निष्ठा की शपथ लेते हैं कि हम अपने मताधिकार का प्रयोग सोच-समझकर करेंगे, डर या लालच से नहीं। लोकतंत्र में आम आदमी का वोट ही सबसे बड़ा हथियार है। एक वोट सरकार बदल सकता है, नीतियों की दिशा तय कर सकता है और देश के भविष्य की पटकथा लिख सकता है। यही कारण है कि मतदाता दिवस हमें याद दिलाता है कि सही प्रतिनिधि का चुनाव उतना ही जरूरी है जितना मतदान करना, क्योंकि एक सही निर्णय विकास का रास्ता खोलता है और एक गलत चुनाव वर्षों की कीमत वसूल सकता है।
भारत की लगभग 65 प्रतिशत आबादी युवा है। यह आंकड़ा नहीं, संभावना है। राष्ट्रीय मतदाता दिवस का एक प्रमुख उद्देश्य नए और युवा मतदाताओं का नामांकन बढ़ाना और उन्हें चुनावी प्रक्रिया से जोड़ना है। युवा जब वोट करते हैं, तो वे सिर्फ आज का नहीं, आने वाले दशकों का भारत चुनते हैं। एक ऐसा भारत जो सांप्रदायिकता और जातिवाद से ऊपर उठकर शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और विकास की बात करे, पॉलिसी बनाने की बात करे।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस नागरिकों के बीच चुनावी जागरूकता फैलाने का मंच है। मतदान की प्रक्रिया, आचार संहिता, मतदाता सूची में नामांकन, और निष्पक्ष चुनाव की अहमियत। यह दिन बताता है कि लोकतंत्र सहभागी चाहता है। यह दिन देशवासियों को याद दिलाता है कि लोकतंत्र किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि हर नागरिक का साझा सपना है। मतदान अधिकार है, लेकिन उससे भी बड़ा दायित्व है। जब हम वोट देते हैं तो हम सिर्फ एक बटन नहीं दबाते। दरअसल, हम अपने, अपने बच्चे, परिवार और अपने देश के भविष्य पर हस्ताक्षर करते हैं।