नई दिल्ली, 24 जनवरी। अक्सर लोग सिरदर्द होते ही तुरंत पेनकिलर खाने लगते हैं और सोचते हैं कि समस्या सिर में है, लेकिन आयुर्वेद का कहना है कि ऐसा जरूरी नहीं। हमारे सिर का दर्द अक्सर सिर्फ एक संकेत होता है कि शरीर के किसी और हिस्से, खासकर पेट और पाचन तंत्र में गड़बड़ी है।
आसान शब्दों में कहें तो सिरदर्द का असली कारण पेट की परेशानी हो सकती है। महर्षि सुश्रुत ने 'सुश्रुत संहिता' में बताया है कि सिरदर्द के कई प्रकार होते हैं और ज्यादातर में दोष यानी वात, पित्त और कफ असंतुलित होकर ऊपर सिर तक पहुंच जाते हैं। इसके पीछे अक्सर कब्ज, गैस या एसिडिटी जैसी समस्याएं होती हैं।
अगर आप बहुत तीखा, तला-भुना या खट्टा खाना खाते हैं तो शरीर में पित्त बढ़ता है। यह पित्त रक्त के माध्यम से सिर तक पहुंचकर जलन, भारीपन और आंखों के पीछे दर्द पैदा करता है, जिसे लोग अक्सर माइग्रेन समझ लेते हैं। वहीं, कब्ज या पेट में फंसी गैस भी सिरदर्द का कारण बनती है। पेट में जमा मल और टॉक्सिन्स रक्त को दूषित करते हैं और उनका असर मस्तिष्क पर पड़ता है। ऐसे में सिर्फ बाम लगाना या पेनकिलर लेना असली समस्या हल नहीं करता।
आयुर्वेद में कई असरदार उपाय बताए गए हैं। नस्य क्रिया यानी नाक में देसी घी की कुछ बूंदें डालना, पित्त को शांत करने और नसों को पोषण देने का काम करता है। अगर दर्द एसिडिटी के कारण है, तो रात भर भिगोए हुए धनिया के पानी में मिश्री मिलाकर पीना फायदेमंद है। कब्ज और गैस के लिए अविपत्तिकर चूर्ण और सूखा अदरक (सोंठ) का लेप भी मदद करता है। इसके अलावा, रोज पेनकिलर लेने से बचें। देर रात भारी खाना न खाएं और बहुत ठंडा या बासी भोजन न लें।
आज की आधुनिक रिसर्च भी इस बात को मानती है कि पेट और दिमाग का सीधा कनेक्शन होता है। पेट सही रहेगा तो सिरदर्द अपने आप कम हो जाएगा।