कोझिकोड, 24 जनवरी। शशि थरूर ने केरल कांग्रेस नेताओं की दिल्ली में हुई अहम बैठक में शामिल न होने को लेकर उठी सियासी अटकलों पर शनिवार को विराम लगाने की कोशिश की। उन्होंने साफ कहा कि उनकी गैरमौजूदगी के पीछे कोई राजनीतिक संदेश नहीं था और जो भी बातें उन्हें पार्टी नेतृत्व से करनी थीं, वह पहले ही अंदरूनी तौर पर बता चुके हैं।
यह बैठक शुक्रवार को पार्टी हाईकमान की ओर से बुलाई गई थी, जिसमें आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर चर्चा होनी थी। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने की। थरूर के बैठक में न आने के बाद मीडिया में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं और इसे केरल कांग्रेस में अंदरूनी मतभेदों से जोड़कर देखा जाने लगा।
कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि थरूर हाल ही में कोच्चि में हुई एक पार्टी बैठक में अपने साथ हुए व्यवहार से नाराज हैं। इस बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद थे। देखते ही देखते यह चर्चा पार्टी के भीतर कथित असंतोष की कहानी बन गई।
इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह पार्टी के अंदरूनी मामलों को सार्वजनिक मंच पर नहीं लाना चाहते। उन्होंने कहा, "जो भी मुझे कहना था, मैंने पार्टी नेतृत्व को बता दिया है। इसे सार्वजनिक रूप से कहना सही नहीं है।"
थरूर ने यह भी कहा कि मीडिया में कई तरह की बातें चलती रहती हैं, लेकिन हर बात पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह स्पष्ट करने से इनकार कर दिया कि वह पार्टी की हालिया गतिविधियों से नाराज हैं या नहीं।
दिल्ली की बैठक में शामिल न हो पाने की वजह बताते हुए थरूर ने कहा कि उन्होंने पहले ही पार्टी नेतृत्व को इसकी जानकारी दे दी थी। उन्होंने कहा कि उनके पास पहले से तय कार्यक्रम थे और समय की कमी के चलते दिल्ली से कोझिकोड आना-जाना संभव नहीं था।
थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कोझिकोड में एक साहित्यिक महोत्सव में अपनी नई किताब के विमोचन के लिए मौजूद थे। उन्होंने कहा कि इससे पहले उन्हें राजनीतिक कार्यक्रमों के कारण जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में भी हिस्सा नहीं ले पाने का अफसोस रहा था।
थरूर ने कहा, "एक बार मैं जयपुर साहित्य महोत्सव में नहीं जा सका था, इसलिए इस बार मैं इस कार्यक्रम को छोड़ना नहीं चाहता था।"
इस बीच, कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने भी थरूर का समर्थन करते हुए कहा कि वह सिर्फ एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक मजबूत साहित्यिक व्यक्तित्व भी हैं, इसलिए उनकी व्यस्तताओं को उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।