रिश्वतखोर डाकघर सहायक अधीक्षक को CBI कोर्ट का बड़ा झटका, 4 साल की जेल और 1 लाख का जुर्माना

रिश्वत मामले में सीबीआई कोर्ट ने डाकघरों के पूर्व सहायक अधीक्षक को चार साल की सजा सुनाई


भुवनेश्वर, 14 मार्च। सीबीआई कोर्ट भुवनेश्वर ने शुक्रवार को रिश्वत के एक मामले में आरोपी राधा कृष्ण साहू (तत्कालीन सहायक अधीक्षक, डाकघर, प्रभारी- बारीपदा सेंट्रल सब-डिवीजन, बारीपदा) को दोषी ठहराया और 4 साल के कठोर कारावास तथा 1 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आरोपी के खिलाफ फरवरी 2014 को मुकदमा दर्ज किया था। आरोप था कि आरोपी ने शिकायतकर्ता से देबसोल ब्रांच पोस्ट ऑफिस में जीडीएस/एमडी/एमसी के तौर पर उसकी जॉइनिंग की प्रक्रिया शुरू करने के बदले 2 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी।

आरोपी ने उसकी जॉइनिंग के लिए कोई कदम नहीं उठाया और 3 फरवरी 2014 को दो लाख रुपए में से 50,000 रुपए की मांग की। जब शिकायतकर्ता ने 50,000 रुपए देने में अपनी असमर्थता जताई तो आरोपी 2 किस्तों में पैसे लेने पर सहमत हो गया। यानी, 6 फरवरी 2014 को बालिगंज स्थित अपने किराए के घर पर 50,000 रुपए में से 20,000 रुपए लेना तय हुआ।

केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी को शिकायतकर्ता से 20,000 रुपए की रिश्वत मांगते और लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। जांच के बाद सीबीआई ने 25 जून 2014 को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

सुनवाई के बाद, न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया और 4 साल जेल की सजा सुनाई।

वहीं, पिछले दिनों सीबीआई ने फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) डिपो, चंदौसी (संभल, उत्तर प्रदेश) में रिश्वतखोरी के मामले में दो अधिकारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने एक निजी फर्म के मालिक की लिखित शिकायत पर मामला दर्ज किया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह एफसीआई बबराला डिपो में चावल के 16 ढेर (स्टैक) जमा कर चुका था और आगे 8 ढेर जमा करने की योजना बना रहा था। डिपो प्रभारी ने स्टैक पास करने के लिए अवैध रूप से 50,000 रुपए की मांग की और शेष 8 स्टैक के लिए प्रत्येक पर 15,000 रुपए की अतिरिक्त मांग की। जांच में पता चला कि प्रबंधक भी इस साजिश में शामिल था।
 

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