पाकिस्तान में महंगाई का हाहाकार! पेट्रोल-डीजल और खाने-पीने की चीजें हुईं बेतहाशा महंगी, जनता की कमर टूटी

पाकिस्तान में महंगाई तेज, पेट्रोल-डीजल और खाद्य कीमतों में भारी उछाल


नई दिल्ली, 14 मार्च। पाकिस्तान में अल्पकालिक महंगाई का प्रमुख सूचकांक सेंसिटिव प्राइस इंडिकेटर (एसपीआई) 11 मार्च को समाप्त सप्ताह में सालाना आधार पर 6.44 प्रतिशत बढ़ गया। इसकी मुख्य वजह पेट्रोलियम उत्पादों और जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी बताई जा रही है।

पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (पीबीएस) के आंकड़ों के हवाले से द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सूचकांक पिछले सप्ताह की तुलना में 1.89 प्रतिशत बढ़ा, जो घरेलू इस्तेमाल की प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल को दर्शाता है।

रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल की कीमतों में 20.60 प्रतिशत और डीजल में 19.54 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, एलपीजी की कीमतों में 12.13 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जिसने महंगाई को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई।

खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। प्याज 9.63 प्रतिशत, केला 1.44 प्रतिशत और गेहूं का आटा 1.28 प्रतिशत महंगा हुआ।

इसके अलावा चिकन 0.66 प्रतिशत, दाल माश 0.55 प्रतिशत, जलावन लकड़ी 0.38 प्रतिशत, चना दाल 0.10 प्रतिशत, ताजा दूध 0.08 प्रतिशत और पका हुआ बीफ 0.02 प्रतिशत महंगा हुआ।

एक अन्य हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान अल्पकालिक विदेशी प्रेषण (रेमिटेंस) और बाहरी मदद पर अत्यधिक निर्भरता के कारण एक खतरनाक आर्थिक जाल में फंसता जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान की जीडीपी में रेमिटेंस की हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो निर्यात आय के बराबर हो गई है। इससे बंद पड़ी फैक्ट्रियों, उच्च बेरोजगारी और उत्पादन क्षमता के कम इस्तेमाल जैसी आर्थिक कमजोरियां छिप रही हैं।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2026 से 2031 के बीच पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर कर्ज, महंगाई और बढ़ती गरीबी का गहरा असर देखने को मिल सकता है, जिससे आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ेगा।

बताया गया है कि 1958 से अब तक पाकिस्तान 26 बार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के कार्यक्रमों में शामिल हो चुका है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। इन कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान को अब तक 34 अरब डॉलर से अधिक की मदद मिली है। हालिया 7 अरब डॉलर का एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी कार्यक्रम 2024 में शुरू हुआ, जिसे 2025-26 तक बढ़ाया गया है, जो देश की बढ़ती बाहरी मदद पर निर्भरता को दर्शाता है।
 

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