बुनियादी ढांचे के विस्तार और नए अवसरों के साथ जम्मू-कश्मीर भारत की विकास गाथा का अग्रणी बन रहा: डॉ. जितेंद्र सिंह

बुनियादी ढांचे के विस्तार और नए अवसरों के साथ जम्मू-कश्मीर भारत की विकास गाथा का अग्रणी बन रहा: डॉ. जितेंद्र सिंह


कठुआ, 14 मार्च। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्‍य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कठुआ जिले के गदाधर गांव में एक प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनी की दवा निर्माण सुविधा की आधारशिला रखी।

भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) के सहयोग से ऑर्किड फार्मा द्वारा 600 से 700 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश वाली यह परियोजना स्थापित की जा रही है।

इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने बोलते हुए कहा कि भारत सरकार की उत्पादन-संबंधी प्रोत्साहन योजना के तहत किया जा रहा लगभग 600 करोड़ रुपए का निवेश जम्मू-कश्मीर क्षेत्र की औद्योगिक और नवाचार क्षमता में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा से लगभग 400 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है। साथ ही आपूर्तिकर्ताओं, लॉजिस्टिक्स प्रदाताओं और अन्य संबद्ध क्षेत्रों के लिए इतनी ही संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि अपने बढ़ते औद्योगिक बुनियादी ढांचे के साथ कठुआ में भारत के फार्मा निर्यात मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण दवा विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने की क्षमता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस परियोजना को क्षेत्र के फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि इस संयंत्र में महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक मध्यवर्ती एमिनो सेफालोस्पोरानिक एसिड (एसीए) का निर्माण किया जाएगा, जो सेफालोस्पोरिन एंटीबायोटिक्स के उत्पादन में एक प्रमुख घटक है। वर्तमान में भारत इस मध्यवर्ती के आयात के लिए लगभग पूरी तरह से चीन पर निर्भर है, जिससे आपूर्ति सुरक्षा, मूल्य स्थिरता और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

मंत्री ने कहा कि कठुआ स्थित यह संयंत्र दवा निर्माण में भारत की रणनीतिक क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेगा और महत्वपूर्ण मध्यवर्ती पदार्थों पर आयात निर्भरता को कम करेगा। उन्होंने कहा, "एंटीबायोटिक्स आधुनिक स्वास्थ्य सेवा का आधार हैं, और महामारी ने दिखाया है कि आवश्यक वस्तुओं के लिए किसी एक भौगोलिक क्षेत्र पर निर्भरता कितनी जल्दी राष्ट्रीय कमजोरी बन सकती है।"

डॉ. जितेंद्र सिंह ने नीतिगत दृष्टिकोण की व्यापक रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को महत्वपूर्ण स्वास्थ्य देखभाल प्रौद्योगिकियों और दवा आपूर्ति श्रृंखलाओं में आत्मनिर्भर बनाने के दृष्टिकोण को दर्शाती है। उन्होंने केंद्रीय बजट में घोषित 10,000 करोड़ रुपए की बायोफार्मा शक्ति पहल का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य भारत के जैव प्रौद्योगिकी और जैव-औषधीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।

मंत्री ने कहा कि भारत वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी और दवा क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में तेजी से उभर रहा है, वर्तमान में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में जैव विनिर्माण में तीसरे और वैश्विक स्तर पर 30वें स्थान पर है। उन्होंने कहा, "इस तरह की उन्नत दवा विनिर्माण इकाइयों की स्थापना से कठुआ को भारत के दवा निर्यात मानचित्र पर स्थान मिलने की संभावना है।"

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि कठुआ परियोजना फार्मास्युटिकल वैल्यू चेन में भारत की प्रगति करने की मंशा को दर्शाती है, जिससे आवश्यक दवाओं के एक विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में देश की भूमिका मजबूत होती है, विशेष रूप से उन देशों के लिए जो स्वास्थ्य आपात स्थितियों के दौरान भारत पर निर्भर रहते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर में उन्नत दवा उत्पादन संयंत्र स्थापित करना क्षमता निर्माण, कौशल विकास और दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर केंद्रित एक नए विकास दृष्टिकोण का संकेत है। उन्होंने कहा, "यह केवल आयात कम करने के बारे में नहीं है। यह उन क्षेत्रों में रणनीतिक क्षमता का निर्माण करने के बारे में है जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।" उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की परियोजनाएं ज्ञान-आधारित उद्योगों के माध्यम से जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों को राष्ट्रीय विकास गाथा में एकीकृत करती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की परियोजनाएं न सिर्फ भारत की दवा उत्पादन क्षमता का विस्तार करती हैं, बल्कि वैश्विक व्यवधानों के दौरान भी आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और सामर्थ्य सुनिश्चित करके देश की स्वास्थ्य सुरक्षा को भी मजबूत करती हैं।

जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश गोखले ने कहा कि जैव अर्थव्यवस्था देश की वैज्ञानिक और आर्थिक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है, और उन्होंने आगे कहा कि कठुआ में उभरते प्रयासों जैसी विज्ञान आधारित जैव विनिर्माण पहलें यह दर्शाती हैं कि भारत जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण में एक मजबूत वैश्विक प्रतियोगी बनने की क्षमता का निर्माण कैसे कर रहा है।

इस अवसर पर बीआईआरएसी के प्रबंध निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार, धनूका समूह के अध्यक्ष राम गोपाल अग्रवाल, ऑर्किड बायोफार्मा के प्रबंध निदेशक मनीष धनूका और कठुआ के उपायुक्त श्री राजेश शर्मा भी उपस्थित थे।

यह उल्लेख करना प्रासंगिक है कि कठुआ में स्थित इस सुविधा का विकास ऑर्किड बायो फार्मा द्वारा किया जा रहा है। यह कंपनी सेफालोस्पोरिन एंटीबायोटिक दवाओं के विश्व के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक है और 60 से अधिक देशों में कार्यरत है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से 200 से अधिक वैश्विक ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करती है।
 

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