नई दिल्ली, 14 मार्च। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बसपा संस्थापक कांशीराम को लेकर दिए गए बयान पर शनिवार को सियासी विवाद गहरा गया। सपा, भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी देखने को मिली।
राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा था कि अगर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू आज जीवित होते, तो कांशीराम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते। राहुल गांधी ने यह टिप्पणी लखनऊ में कांशीराम की जयंती के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए की थी।
राहुल गांधी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि कांशीराम के योगदान को किसी एक राजनीतिक दल के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, कांशीराम के योगदान को राजनीतिक दलों के आधार पर बांटने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने समाज के वंचित और कमजोर वर्गों को ताकत दी और उन्हें संविधान में मिले अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि कांशीराम ने समाज को असमानता से आगे बढ़कर समानता की राह पर चलने की दिशा दिखाई। इसी वजह से वंचित समाज उन्हें अपना मार्गदर्शक मानता है। उनकी विरासत को भुलाया नहीं जा सकता।
वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी पार्टी जैसे क्षेत्रीय दलों का जन्म कांग्रेस शासन के दौरान बनी राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़ा है।
उन्होंने कहा, "अगर कांग्रेस के नेता समझें कि बसपा और सपा की उत्पत्ति किन हालातों में हुई, तो उन्हें अपने सवालों के जवाब मिल जाएंगे। कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण ही बसपा व सपा जैसे दल अस्तित्व में आए।"
उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस के भीतर जाति व्यवस्था की सोच रखने वाले लोगों ने पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों को हाशिए पर रखा, तब कांशीराम और मुलायम जैसे नेता सामने आए और इन वर्गों की आवाज बने।
उधर, भाजपा नेताओं ने भी राहुल गांधी के बयान की आलोचना की। भाजपा विधायक राज सिन्हा ने कहा कि राहुल गांधी जो कहते हैं, उस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "अगर वह होते तो ऐसा होता। ये सब बेकार की बातें हैं। ऐसा सोचना सिर्फ राहुल गांधी की सोच हो सकती है।"
इस बीच कांग्रेस ने राहुल गांधी के बयान का बचाव किया। पार्टी प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि राहुल गांधी ने अपने बयान में कांशीराम के कद और महत्व को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी ने साफ कहा था कि अगर कांशीराम जवाहरलाल नेहरू के समय में होते, तो वह किसी राज्य के मुख्यमंत्री होते।"
सुरेंद्र राजपूत ने बसपा प्रमुख मायावती के 'एक्स' पर किए एक पोस्ट का जवाब देते हुए उन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "मायावती इसलिए परेशान हैं क्योंकि बहुजन मिशन उनके जाल में नहीं फंस रहा है। जिन्होंने बहुजन मिशन को बेच दिया, वे आज कांग्रेसको सलाह न दें, खासकर वह ज्ञान जो उन्हें भाजपा के साथ रहकर 'व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी' से मिल रहा है।"