सोशल मीडिया लिंक से साइबर ठगी का खेल, कोलकाता से 5 आरोपी गिरफ्तार

सोशल मीडिया लिंक से साइबर ठगी का खेल, कोलकाता से 5 आरोपी गिरफ्तार


कोलकाता, 24 जनवरी। कोलकाता साइबर पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड गिरोह का खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साथ ही उनके पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन, राउटर और कई आपत्तिजनक स्क्रीनशॉट बरामद किए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

कोलकाता साइबर पुलिस स्टेशन में 19 दिसंबर 2025 को केस दर्ज किया गया था। मामले में पहले से गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और पुख्ता खुफिया सूचना मिलने के बाद साइबर पुलिस ने 24 जनवरी को महेशतला थाना क्षेत्र में एक अहम छापेमारी की।

इस छापेमारी के दौरान कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 22 वर्षीय अभिमन्यु कुमार उर्फ राजा कुमार, 22 वर्षीय सेजेन फिलिप्स, 20 वर्षीय मोहम्मद समर, 28 वर्षीय नीरज कुमार और 19 वर्षीय मोहम्मद इमरान शामिल हैं। ये सभी अलग-अलग राज्यों के रहने वाले हैं, जिनमें बिहार और महाराष्ट्र शामिल हैं। सभी एक संगठित तरीके से साइबर अपराध को अंजाम दे रहे थे। पुलिस के अनुसार, ये आरोपी पहले से गिरफ्तार साइबर ठगों के संपर्क में थे और उसी गिरोह के लिए काम कर रहे थे।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 10 लैपटॉप, 24 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 2 राउटर और कई आपत्तिजनक स्क्रीनशॉट बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल साइबर ठगी, फर्जी लिंक बनाने और लोगों के मोबाइल फोन हैक करने के लिए किया जा रहा था।

जांच में सामने आया कि ये लोग मैलिशियस एपीके फाइलें तैयार करते थे। इन फाइलों को अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन, लालच भरे मैसेज और फर्जी लिंक के जरिए लोगों के मोबाइल पर भेजा जाता था। जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक कर एपीके फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करता था, उसके बाद आरोपी उस मोबाइल पर पूरी तरह से कंट्रोल हासिल कर लेते थे।

एपीके इंस्टॉल होते ही आरोपियों को पीड़ित के मोबाइल का रिमोट एक्सेस मिल जाता था। वे मोबाइल में मौजूद बैंकिंग ऐप्स, यूपीआई, ओटीपी और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बना लेते थे। इसके बाद बिना पीड़ित को भनक लगे, उसके बैंक खाते से पैसे निकालकर उन्हें अपने या अपने नेटवर्क से जुड़े अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते थे। कई मामलों में पीड़ितों को तब पता चलता था, जब उनके खाते से बड़ी रकम गायब हो चुकी होती थी।

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि ये सभी आरोपी अकेले नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक साजिश के तहत काम कर रहे थे। पहले से गिरफ्तार आरोपियों के साथ इनका सीधा संपर्क था और एक ही संगठित आपराधिक साजिश के हिस्से के रूप में मिलकर काम कर रहे थे।
 

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