बच्चों की मानसिक सुरक्षा शिक्षा जितनी ही अहम! सुधा मूर्ति ने बताया क्यों है भावनात्मक सेहत पर ध्यान ज़रूरी

बच्चों की मानसिक सुरक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी उनकी शिक्षाः सुधा मूर्ति


नई दिल्ली, 13 मार्च। शुक्रवार को राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान विभिन्न दलों के कई सांसदों ने अलग-अलग विषयों से जुड़े निजी विधेयक पेश किए। इन निजी विधेयकों का उद्देश्य कृषि, डिजिटल मंचों की जवाबदेही, शहरी विकास, वरिष्ठ नागरिकों की भागीदारी तथा संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर नए कानूनी प्रावधान लाना है।

वहीं इस दौरान एक गैर सरकारी विधेयक 'लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण (संशोधन) विधेयक 2024' पर सदन में चर्चा भी की गई है। इस विषय पर मनोनीत सांसद सुधा मूर्ति ने कहा कि सबसे पहली बात यह है कि जब किसी बच्चे के साथ कोई गलत घटना होती है तो सबसे पहले उसे यह भरोसा दिया जाना चाहिए कि उसमें उसकी कोई गलती नहीं है। यह भरोसा मां दे सकती है, शिक्षक दे सकते हैं और प्रशिक्षित काउंसलर दे सकते हैं। लेकिन आज हमारे देश में कई स्कूल ऐसे हैं जहां हजारों बच्चों पर केवल एक काउंसलर होता है, और कई जगह तो काउंसलर होते ही नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट मानक तय करने चाहिए कि कितने बच्चों पर एक काउंसलर होना चाहिए। यदि किसी स्कूल में यह व्यवस्था नहीं है, तो उसके पंजीकरण को रद्द करने पर भी विचार होना चाहिए, क्योंकि बच्चों की मानसिक सुरक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी उनकी शिक्षा। उन्होंने कहा कि माता-पिता को भी संवेदनशील बनाना होगा। आज हम अक्सर बच्चों से कहते हैं, "अच्छे अंक लाओ, प्रतियोगिता जीतो, आईआईटी या बड़े कॉलेज में प्रवेश लो।" लेकिन अगर बच्चा मानसिक रूप से असुरक्षित, डरा हुआ या चिंतित है, तो फिर उस सफलता का कोई अर्थ नहीं रह जाता।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए बी.एड. की पढ़ाई में बच्चों के व्यवहार, उनके मानसिक संकेतों और उनकी भावनात्मक स्थिति को समझने का प्रशिक्षण भी अनिवार्य होना चाहिए। शिक्षक को यह पहचानना आना चाहिए कि अगर कोई बच्चा अचानक चुप हो गया है, डरा हुआ है या उसके व्यवहार में बदलाव आया है तो उसके पीछे क्या कारण हो सकता है। एक अन्य निजी विधेयक के तहत कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने जलवायु अनुकूल कृषि और किसान संरक्षण विधेयक प्रस्तुत करने की अनुमति मांगी। इस विधेयक का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना तथा किसानों को न्याय दिलाने के लिए राष्ट्रीय जलवायु अनुकूल कृषि मिशन की स्थापना करना है।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिकार (संशोधन) विधेयक भी पेश किया, जिसका लक्ष्य भूमि अधिग्रहण से जुड़े प्रावधानों को और अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाना है। सांसद धनंजय भीमराव महाडिक ने कोल्हापुरी चमड़ा शिल्प (संरक्षण और आजीविका सुरक्षा) विधेयक, 2026 पेश करने की अनुमति मांगी। इस विधेयक का उद्देश्य कोल्हापुरी पारंपरिक चमड़ा शिल्प के संरक्षण, विकास और उससे जुड़े कारीगरों की आजीविका को सुरक्षित करना है। डिजिटल मंचों से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखते हुए एक अन्य प्रस्तावित विधेयक, डिजिटल नेटवर्किंग मंच (जवाबदेही और उपयोगकर्ता संरक्षण) विधेयक, 2026 भी पेश किया गया। इसका उद्देश्य डिजिटल नेटवर्किंग सेवाओं की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना, उपयोगकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना तथा इन सेवाओं के दुरुपयोग को रोकना है।

इसके अलावा, सांसद वी. शिवदासन और डॉ. भीम सिंह ने संविधान में संशोधन से जुड़े अलग-अलग विधेयक प्रस्तुत करने की अनुमति मांगी। इनमें एक प्रस्ताव में संविधान में नया अनुच्छेद 21बी जोड़ने और दूसरे में अनुच्छेद 366 में संशोधन का सुझाव दिया गया है। डॉ. भीम सिंह ने एक और विधेयक पेश किया, जिसमें देश के शहरी क्षेत्रों के सुव्यवस्थित विकास और नियमन के लिए शहरी क्षेत्र विकास और विनियमन समिति स्थापित करने का प्रस्ताव है। ओडिशा से भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने सिल्वर इकोनॉमी प्रोत्साहन विधेयक प्रस्तुत किया।

इस विधेयक का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक उत्पादकता, नवाचार और सामाजिक योगदान में सक्रिय भागीदार के रूप में मान्यता देना तथा उनके लिए रोजगार, उद्यमिता और मार्गदर्शन से जुड़े संस्थागत ढांचे विकसित करना है। वहीं सांसद राघव चड्ढा ने देश में संपत्ति के टोकनीकरण को कानूनी मान्यता देने और उसके नियमन के लिए एक विधेयक पेश करने की अनुमति मांगी। प्रस्तावित कानून के तहत वास्तविक संपत्तियों के टोकन आधारित निर्गम, व्यापार, अभिरक्षा और निपटान के लिए वैधानिक ढांचा तैयार करने तथा निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। इन सभी विधेयकों को पेश करने के लिए सदन से अनुमति मांगी गई, जिसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया गया। ये निजी सदस्य विधेयक हैं, जिन पर आगे की संसदीय प्रक्रिया के तहत विचार किया जाएगा।
 

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