सुस्ती-कमजोरी से हैं परेशान? किचन के इस आयुर्वेदिक नुस्खे से शरीर के टॉक्सिन निकालें और पाएं फुर्ती

सुस्ती और कमजोरी से परेशान? इस आयुर्वेदिक मिश्रण से शरीर से निकालें टॉक्सिन और पाएं राहत


नई दिल्ली, 13 मार्च। मार्च के महीने को सुस्ती का महीना कहा जाता है, क्योंकि हर वक्त नींद, बैचेनी, कमजोरी और बदलता मौसम शरीर को प्रभावित करता है, लेकिन यह आवश्यक नहीं है कि यह सिर्फ मौसम का ही असर हो। यह संकेत हो सकता है शरीर में आम की वृद्धि की। आम यानी टॉक्सिन की वृद्धि शरीर को अधमरा कर देती है और शरीर अंदर से कमजोर होना शुरू हो जाता है।

आयुर्वेद में टॉक्सिन की वृद्धि को रोकने के लिए कई तरीके बताए गए हैं, लेकिन हम आपके लिए एक आसान और प्रभावी तरीका लेकर आए हैं, जिससे शरीर के विषाक्त पदार्थ आसानी से बाहर हो सकें। खास बात यह भी है कि इस नुस्खे से जुड़ी सारी सामग्री आसानी से किचन में मिल जाएगी। त्रिफला, गिलोय, शहद और हल्दी को मिलाकर गुनगुने पानी के साथ सुबह खाली पेट सेवन करने की सलाह दी जाती है।

आयुर्वेद के मुताबिक त्रिफला, गिलोय और हल्दी जैसे पारंपरिक घटक पाचन तंत्र, आंतों और यकृत के संतुलन में सहायक माने गए हैं। जब पाचन व्यवस्थित होता है, तो शरीर की स्वाभाविक शुद्धि प्रणाली भी बेहतर तरीके से कार्य करने लगती है। कुछ दिनों तक ऐसे संतुलित संयोजन का उपयोग शरीर को हल्का और व्यवस्थित रखने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा, नींबू, अदरक या सौंठ को भी पानी के साथ मंद पड़े पाचन को सही किया जा सकता है।

मिश्रण में मौजूद त्रिफला आंतों की सफाई कर आंतों को गतिशील बनाता है और गंदे बैक्टीरिया को खत्म कर मल को निकालने में मदद करता है, जबकि गिलोय को आयुर्वेद में त्रिदोषों को संतुलन करने का साधन माना गया है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर पेट और लिवर को सही से कार्य करने की क्षमता देता है। वहीं शहद आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के प्रभाव को अधिक बढ़ा देता है, जबकि हल्दी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ शरीर से गंदे बैक्टीरिया का भी नाश करती है।

जोड़ों से जुड़ी परेशानी वाले लोग और गर्भवती महिलाएं सेवन से पहले चिकित्सक से सलाह लें। इसके साथ ही बच्चों को भी परामर्श के बाद ही डिटॉक्स करने वाले औषधीय पानी सेवन के लिए दें।
 

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