बरपेटा मेडिकल कॉलेज से पूर्व राष्ट्रपति का नाम हटाने पर बवाल, गौरव गोगोई बोले- 'यह असम का अपमान'

बरपेटा मेडिकल कॉलेज से फखरुद्दीन अली अहमद का नाम हटाने का गौरव गोगोई ने किया विरोध


गुवाहाटी, 12 मार्च। गौरव गोगोई ने गुरुवार को असम सरकार के उस कथित फैसले की कड़ी आलोचना की, जिसमें फखरुद्दीन अली अहमद के नाम को फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज से हटाने की बात कही गई है। उन्होंने इस कदम को एक प्रतिष्ठित असमिया व्यक्तित्व और स्वतंत्रता सेनानी का अपमान बताया।

गौरव गोगोई ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में गहरी चिंता जताई और कहा कि फखरुद्दीन अली अहमद न केवल सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी थे, बल्कि भारत के राष्ट्रपति बनने वाले पहले असमिया भी थे।

फखरुद्दीन अली अहमद ने 1974 से 1977 तक भारत के पांचवें राष्ट्रपति के रूप में सेवा दी और देश के लिए उनके योगदान और असम का प्रतिनिधित्व सर्वोच्च संवैधानिक पद पर करने के लिए उन्हें याद किया जाता है।

गोगोई ने कहा कि बारपेटा मेडिकल कॉलेज से उनका नाम हटाना राज्य सरकार के निर्णय के तर्क पर गंभीर सवाल उठाता है।

उन्होंने कहा, “बारपेटा मेडिकल कॉलेज से फखरुद्दीन अली अहमद का नाम हटाने का असम सरकार का निर्णय अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और असम के लोगों की भावनाओं को गहराई से आहत करता है।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह कदम राजनीतिक प्रेरणा से उठाया गया हो सकता है और सवाल उठाया कि क्या राज्य सरकार चुनावी लाभ के लिए विभाजनकारी राजनीति करने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि ऐसे कदम असम के महान व्यक्तित्वों की विरासत मिटाने का खतरा पैदा करते हैं, जिन्होंने राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

गोगोई ने राज्य सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए कहा कि बारपेटा मेडिकल कॉलेज के लिए फखरुद्दीन अली अहमद का नाम बनाए रखना चाहिए।

उन्होंने जोर दिया कि असम के महान व्यक्तित्वों के योगदान को सम्मानित करना और उनकी विरासत को संरक्षित रखना राज्यवासियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

इससे पहले बुधवार को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य कैबिनेट के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि इस कदम का उद्देश्य राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नामकरण में समानता बनाए रखना है।

सरमा ने कहा कि अधिकांश राज्य संचालित मेडिकल कॉलेज अपने भौगोलिक स्थान के नाम पर रखे गए हैं और बारपेटा संस्थान को इसी पैटर्न में लाने के लिए यह निर्णय लिया गया।

उन्होंने कहा, यह विकास मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद सामने आया, जिसमें राज्य सरकार ने बारपेटा जिले में स्थित संस्थान का नाम बदलने को मंजूरी दी।
 

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