कोलकाता, 12 मार्च। आर. एन. रवि ने गुरुवार सुबह पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह सुबह करीब 11:30 बजे लोक भवन (पहले राजभवन) में आयोजित किया गया।
नए राज्यपाल को सुजॉय पॉल ने शपथ दिलाई। इस मौके पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, विधानसभा के स्पीकर बिमान बंदोपाध्याय और राज्य में लेफ्ट फ्रंट के चेयरमैन बिमान बोस सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
हालांकि, कई लोगों को हैरानी हुई कि आमंत्रण मिलने के बावजूद पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। दिलचस्प बात यह भी रही कि भारतीय जनता पार्टी का कोई भी प्रतिनिधि इस समारोह में नजर नहीं आया।
आर. एन. रवि ने सी. वी. आनंद बोस की जगह ली है। आनंद बोस ने 5 मार्च की शाम को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और उसी शाम आर. एन. रवि को उनका उत्तराधिकारी घोषित कर दिया गया था।
रवि बुधवार को कोलकाता पहुंचे थे। उसी शाम आनंद बोस शहर छोड़कर अपने गृह राज्य केरल के लिए रवाना हो गए।
राज्य छोड़ने से पहले सी. वी. आनंद बोस ने लोक भवन के सोशल मीडिया अकाउंट पर पश्चिम बंगाल के लोगों के नाम एक भावुक “ओपन लेटर” पोस्ट किया। इस पत्र में उन्होंने लिखा कि पश्चिम बंगाल और यहां के लोगों के साथ उनका भावनात्मक रिश्ता हमेशा बना रहेगा।
आर. एन. रवि पिछले करीब डेढ़ दशक में पश्चिम बंगाल के गवर्नर बनने वाले दूसरे ऐसे अधिकारी हैं, जो पहले इंटेलिजेंस ब्यूरो में शीर्ष पद पर रह चुके हैं।
इससे पहले, 2011 के महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों से ठीक पहले एम. के. नारायणन ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। नारायणन पहले इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी रह चुके थे। उस चुनाव में 34 साल से चल रहे लेफ्ट फ्रंट के शासन का अंत हुआ था और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आई थी।
यह केवल एक संयोग हो सकता है। लेकिन, आर. एन. रवि की पश्चिम बंगाल के नए गवर्नर के रूप में नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब राज्य में महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।