ग्वालियर HPV वैक्सीन विवाद: बच्चियों के बीमार होने का दावा बेबुनियाद, PIB फैक्ट चेक ने खोला सच

ग्वालियर में एचपीवी वैक्सीन से बच्चियों के बीमार होने का दावा झूठा


नई दिल्ली, 12 मार्च। मध्यप्रदेश के ग्वालियर से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि ग्वालियर में बालिकाओं को उनके माता-पिता की अनुमति के बिना एचपीवी वैक्सीन लगा दी गई, जिसके बाद उनकी तबीयत खराब हो गई। हालांकि पीआईबी फैक्ट चेक ने इन दावों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है।

पीआईबी फैक्ट चेक ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा तथ्यहीन है। एजेंसी के अनुसार, बालिकाओं को टीका लगाने से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया था और अभिभावकों की सहमति भी ली गई थी।

दरअसल 8 मार्च 2026 को ग्वालियर जिले के विकासखंड डबरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पिछौर में एचपीवी वैक्सीन का टीकाकरण सत्र आयोजित किया गया था। इस सत्र में चारकरी गांव और आसपास के इलाके की किशोरी बालिकाओं को टीका लगाया गया। टीकाकरण से पहले आशा कार्यकर्ता ने बालिकाओं के माता-पिता और परिजनों को इस वैक्सीन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद उनकी सहमति मिलने पर ही नौ किशोरियों को टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य केंद्र लाया गया।

जानकारी के अनुसार, बालिकाओं को उनके अभिभावकों के साथ वाहन के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पिछौर लाया गया था। टीकाकरण से पहले सभी बालिकाओं का पंजीकरण यू-विन पोर्टल पर किया गया। इसके बाद वैक्सीन लगाई गई और फिर करीब आधे घंटे तक सभी को निगरानी में रखा गया कि किसी तरह की परेशानी होने पर तुरंत इलाज किया जा सके।

जब यह प्रक्रिया पूरी हो गई तो बालिकाओं को उसी वाहन से वापस गांव भेज दिया गया। रास्ते में गिजौरी तिराहे के पास कुछ बालिकाओं ने खाने की इच्छा जताई। वाहन रोककर उन्होंने बाहर से स्नैक्स खाया और फिर अपने गांव लौट गईं। आशा कार्यकर्ता के मुताबिक उस समय सभी बालिकाएं बिल्कुल सामान्य और स्वस्थ थीं।

दो दिन बाद यानी 10 मार्च की शाम को चार बच्चियां पूनम, अंजली, रेखा और रजनी पेट दर्द व उल्टी की शिकायत लेकर फिर से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचीं। वहां मौजूद डॉक्टरों ने उनका तुरंत इलाज किया और उन्हें बाहर का खाना न खाने और आराम करने की सलाह दी। प्राथमिक उपचार के बाद सभी बच्चियों की हालत ठीक हो गई और वे अब पूरी तरह स्वस्थ हैं।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बालिकाओं की तबीयत खराब होने का कारण वैक्सीन नहीं बल्कि बाहर का खाना हो सकता है। इसलिए यह कहना कि एचपीवी वैक्सीन की वजह से उनकी हालत बिगड़ी, पूरी तरह गलत और भ्रामक है।

पीआईबी फैक्ट चेक ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली किसी भी जानकारी पर तुरंत भरोसा न करें। सही जानकारी के लिए हमेशा सरकारी या आधिकारिक स्रोतों पर ही विश्वास करना चाहिए, ताकि अफवाहों से बचा जा सके।
 

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