कोलकाता, 12 मार्च। मालदा दक्षिण लोकसभा क्षेत्र, जिसमें 7 विधानसभा सीटें आती हैं, आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अहम बन चुका है। यह क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां पूरी तरह से पराजय झेली, जिससे टीएमसी और भाजपा के लिए मौके खुल गए हैं। 2009 में अस्तित्व में आया यह लोकसभा क्षेत्र अब सियासी दंगल का केंद्र बन गया है, जहां तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और भाजपा के बीच जोरदार मुकाबला होने की संभावना है।
इस क्षेत्र के विधानसभा क्षेत्र, जिनमें मानिकचक, इंग्लिश बाजार, मोथाबारी, सुजापुर, बैष्णबनगर, फरक्का और समसेरगंज शामिल हैं, का चुनावी इतिहास हर बार नई कहानी कहता है। जहां एक ओर तृणमूल कांग्रेस ने अपने वर्चस्व को बढ़ाया है, वहीं भाजपा ने इंग्लिश बाजार सीट पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 2021 के चुनाव में जहां कांग्रेस की स्थिति खराब हुई, वहीं तृणमूल ने कई सीटों पर जीत दर्ज की।
मानिकचक विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान में टीएमसी की साबित्री मित्रा विधायक हैं। 1951 में अस्तित्व में आई मानिकचक विधानसभा सीट पर अब तक 16 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। यह सीट 1957 में चुनावी नक्शे से गायब हो गई थी, लेकिन 1962 में फिर से वापसी की। कांग्रेस ने यहां 9 बार, माकपा ने 4 बार, तृणमूल कांग्रेस ने 2 बार और स्वतंत्र पार्टी ने 1967 में एक बार जीत दर्ज की। तृणमूल कांग्रेस ने 2021 में यहां जीत हासिल की और इस सीट को अपने नाम किया।
इंग्लिश बाजार विधानसभा से वर्तमान में भाजपा की श्रीरूपा मित्रा चौधरी विधायक हैं, जिन्होंने पहली बार पार्टी को यहां जीत दिलाई। इंग्लिश बाजार विधानसभा क्षेत्र में अब तक कुल 17 चुनाव हो चुके हैं, जिसमें 2013 का उपचुनाव भी शामिल है। यह सीट कांग्रेस और भाकपा के गढ़ के रूप में जानी जाती है। कांग्रेस ने यहां 6 बार जीत हासिल की, जबकि भाकपा ने 1969 से 1997 तक लगातार 7 बार जीत दर्ज की। इसके अलावा माकपा, तृणमूल कांग्रेस, भाजपा और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी यहां जीत हासिल की है, लेकिन हर एक पार्टी ने केवल एक बार ही यहां सफलता पाई।
अब तक तीन विधानसभा चुनावों में मोथाबारी ने सबीना यास्मीन को मौका दिया, जो अलग-अलग पार्टियों से चुनाव लड़ीं। 2021 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। इस क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस की बढ़त को सबीना यास्मीन से ही जोड़ा जा सकता है, जो लोकसभा में इस क्षेत्र की मजबूत उपस्थिति का कारण मानी जाती हैं।
1957 में अस्तित्व में आई सुजापुर विधानसभा सीट पर अब तक 18 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इसमें 2009 में दो उपचुनाव भी शामिल हैं। कांग्रेस ने इस सीट पर लगातार 16 बार जीत हासिल की। 1957 के पहले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार मनोरंजन मिश्रा ने जीत दर्ज की थी। 2021 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार यहां जीत हासिल की। सुजापुर की सीट में यह बदलाव तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव को दर्शाता है।
बैष्णबनगर विधानसभा क्षेत्र में 2011 के बाद से तीन विधानसभा चुनाव हुए हैं और हर बार एक अलग पार्टी ने जीत दर्ज की। 2011 में कांग्रेस के इसहाक खान चौधरी ने जीत हासिल की, जबकि 2016 में भाजपा के स्वाधीन कुमार सरकार ने कांग्रेस के अजीज़ुल हक को हराया। 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने इस सीट को जीतने में सफलता हासिल की। लोकसभा चुनावों में भी यह क्षेत्र उतार-चढ़ाव से भरा रहा, जहां कांग्रेस ने 2009 और 2014 में जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा ने 2019 में तृणमूल को हराया और 2024 में कांग्रेस को मात दी।
फरक्का विधानसभा क्षेत्र ने 17 विधानसभा चुनावों में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। कांग्रेस ने यहां 8 बार, माकपा ने 6 बार और बंगला कांग्रेस ने 1967 और 1969 में एक बार जीत दर्ज की थी। 1971 से 1991 तक माकपा का दबदबा रहा था, उसके बाद कांग्रेस ने लगातार पांच बार जीत हासिल की। 2021 में तृणमूल कांग्रेस के मनीरुल इस्लाम ने जीत हासिल की। फरक्का में भाजपा का उभार 2019 के लोकसभा चुनाव से शुरू हुआ। दिलचस्प बात यह है कि इस क्षेत्र से चुने गए सभी 7 विधायक मुस्लिम समुदाय से रहे हैं।
समसेरगंज विधानसभा क्षेत्र की स्थापना 2011 के विधानसभा चुनावों से पहले हुई थी। अब तक यहां तीन चुनाव हो चुके हैं। कांग्रेस पार्टी ने इस क्षेत्र में हमेशा बढ़त बनाई है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने लगातार पिछला चुनाव जीता है। 2011 में माकपा के तौआब अली ने जीत हासिल की थी, जबकि तृणमूल कांग्रेस के अमीरुल इस्लाम ने 2016 और 2021 में जीत दर्ज की।