दांडी मार्च की 96वीं वर्षगांठ पर साबरमती से गूंजी क्रांति की आवाज, छात्रों ने निकाली प्रेरक पदयात्रा

दांडी यात्रा की वर्षगांठ पर साबरमती आश्रम से विद्यार्थियों ने निकाली पदयात्रा


साबरमती, 12 मार्च। गुजरात विद्यापीठ के छात्रों और शिक्षकों ने साबरमती आश्रम से पदयात्रा का आयोजन करके दांडी यात्रा या नमक सत्याग्रह की 96वीं वर्षगांठ मनाई। महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए यात्रा में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

यात्रा में शामिल गुजरात विद्यापीठ के कुलपति हर्षद पटेल ने कहा, "महात्मा गांधी ने 12 मार्च, 1930 को साबरमती आश्रम से नमक सत्याग्रह की शुरुआत की थी। यहीं से दांडी की ऐतिहासिक यात्रा शुरू हुई और इसका पहला पड़ाव गुजरात विद्यापीठ के प्राण-जीवन प्रांगण में था।"

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने महात्मा गांधी को नमन किया है। मुख्यमंत्री के एक्स पोस्ट पर लिखा गया है, "12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से शुरू हुई ऐतिहासिक दांडी मार्च महज पैदल मार्च नहीं थी, बल्कि ब्रिटिश साम्राज्य के अन्याय के खिलाफ जन क्रांति की एक बुलंद आवाज थी। महात्मा गांधी के नेतृत्व में सत्य और अहिंसा के हथियारों से लैस होकर, उन सभी सत्याग्रहियों ने अन्यायपूर्ण नमक कानून का विरोध किया और भारतीयों के स्वतंत्रता संग्राम में नई ऊर्जा और दिशा का संचार किया- उन्हें लाखों-करोड़ों नमन।"

उल्लेखनीय है कि महात्मा गांधी के नेतृत्व में ऐतिहासिक दांडी मार्च अथवा 'नमक सत्याग्रह' का आयोजन 12 मार्च से 6 अप्रैल 1930 के बीच किया गया था। यह अभियान ब्रिटिश सरकार के नमक एकाधिकार के विरुद्ध एक अहिंसक प्रतिरोध और प्रत्यक्ष कार्रवाई थी। गांधी जी ने साबरमती आश्रम से अपने 78 विश्वसनीय स्वयंसेवकों के साथ इस 390 किलोमीटर लंबी यात्रा की शुरुआत की थी। मार्ग में जनसमूह के जुड़ने से यह एक जन आंदोलन में बदल गया। 6 अप्रैल 1930 की सुबह जब गांधी जी ने दांडी (वर्तमान गुजरात के नवसारी जिले में स्थित) पहुंचकर नमक कानून तोड़ा, तो इसने पूरे देश मे सविनय अवज्ञा आंदोलन की अलख जगा दी।
 

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