अमित शाह का भाषण सुन PM मोदी हुए प्रभावित, बोले- 'तथ्यों से भरा, संसदीय परंपराएं और देश की प्रगति का संदेश'

'तथ्यों से भरा, संसदीय परंपराओं के महत्व को बताया', पीएम मोदी ने की अमित शाह के भाषण की प्रशंसा


नई दिल्ली, 12 मार्च। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में दिए गए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भाषण की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि इस भाषण में संसद की परंपराओं के महत्व और देश की प्रगति के लिए सामूहिक प्रयास का जिक्र था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "गृह मंत्री अमित शाह का शानदार भाषण। उनका भाषण तथ्यों से भरा हुआ है और संसदीय परंपराओं के महत्व के साथ-साथ देश की प्रगति के लिए मिलकर काम करने के महत्व को भी बताता है।"

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में चर्चा का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं है। लगभग 4 दशक के बाद लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया है। उन्होंने से संसदीय राजनीति और सदन के लिए यह अफसोसजनक घटना करार दिया।

अमित शाह ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष किसी दल के नहीं होते बल्कि सदन के होते हैं और सदन के सभी सदस्यों के अधिकारों के संरक्षक होते हैं। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना कोई साहसिक घटना नहीं है।

उन्होंने कहा कि लगभग 13 घंटों तक पक्ष-विपक्ष ने इस पर चर्चा की है और 42 से अधिक सांसदों ने इसमें हिस्सा लिया है। स्पीकर के निर्णय को अंतिम मानने के विपरीत विपक्ष ने स्पीकर की निष्ठा पर सवालिया निशान खड़ा किया है। शाह ने कहा कि लोकसभा भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है और न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में हमारे लोकतंत्र की एक साख बनी है और पूरी दुनिया इसे स्वीकार करती है। जब इस पंचायत के मुखिया की निष्ठा पर सवालिया निशान लगता है तो सिर्फ देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।

अमित शाह ने कहा कि हम भी विपक्ष में रहे हैं और उस दौरान तीन बार स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया, लेकिन हमारी पार्टी और गठबंधन ने कभी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने कहा कि हमने रचनात्मक विपक्ष के रूप में काम किया है, स्पीकर की गरिमा का संरक्षण करने का काम किया है और स्पीकर से हमारे कानूनी अधिकारों के संरक्षण की मांग भी की है। शाह ने कहा कि हम कभी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाए।

अपने भाषण में अमित शाह ने कहा कि लोकसभा के नियम 374 में अव्यवस्था, अनुशासनहीनता की स्थिति में स्पीकर को चेतावनी देने, नामित करने, निष्कासित करने और निलंबन का अधिकार है। उन्होंने कहा कि आंदोलन और एक्टिविस्ट को सदन में सदन के नियमों के अनुसार ही चलना पड़ेगा। शाह ने कहा कि नियम 375 के तहत गंभीर अव्यवस्था की स्थिति में सदन को स्थगित करना होता है। उन्होंने कहा कि नियम 380 के अधीन स्पीकर को असंसदीय शब्दों औऱ टिप्पणियों को कार्यवाही से हटाने का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि लय में की गई असंसदीय टिप्पणियां संसद के इतिहास में नहीं रखनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से आने वाले सासंद भी यही संस्कार लेकर जाएंगे। शाह ने कहा कि असंसदीय शब्दों की सूची सदन के अस्तित्व में आने से लेकर आज तक इस पद पर बैठे अनेक महानुभावों ने बनाई और वह सब पर बाध्यकारी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को संविधान ने अधिकार दिया है लेकिन कोई विशेषाधिकार नहीं दिया है। अधिकार का संरक्षण कर सकते हैं लेकिन विशेषाधिकार के मुगालते में जीने वालों को उनकी पार्टी और जनता भी संरक्षण नहीं देती है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 16वीं लोकसभा में 331 बैठकें हुईं, 17वीं लोकसभा में 274 और मौजूदा लोकसभा में 2025 तक 103 बैठकें हुईं। वर्ष 2025 का बजट सत्र 118 प्रतिशत उत्पादकता वाला रहा। उन्होंने कहा कि 16वीं लोकसभा की उत्पादकता 91 प्रतिशत, 17वीं की उत्पादकता 91 प्रतिशत और 18वीं की उत्पादकता 91 प्रतिशत रही और इनमें अधिकतम उत्पादकता मौजूदा स्पीकर ओम बिरला के कार्यकाल में ही हुई है। अध्यक्ष ने शून्य काल की अवधि को 5 घंटे तक पहुंचाया है।

शाह ने कहा कि विधायक और सांसद रहते हुए उन्हें 30 साल हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने कभी नहीं देखा कि स्पीकर ने सदस्यों को रात 12 बजे तक शून्य काल के मुद्दे उठाने का मौका दिया हो। उन्होंने 202 सांसदों को प्रश्न उठाने का मौका दिया और विपक्ष कहता है कि उन्हें मुद्दे उठाने का मौका नहीं मिलता।
 

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