पश्चिम एशिया युद्ध का कहर: ईरान में फंसे तमिलनाडु के सैकड़ों मछुआरे, परिजनों को वापसी की बेचैनी

युद्ध के बीच पश्चिम एशिया में फंसे तमिलनाडु के सैकड़ों मछुआरे, परिवार वालों ने जताई चिंता


चेन्नई, 12 मार्च। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण ईरान सहित कई देशों में काम कर रहे तमिलनाडु के सैकड़ों मछुआरे फंस गए हैं। हालात बिगड़ने के साथ ही राज्य के तटीय जिलों में रहने वाले उनके परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिवहन और समुद्री गतिविधियों पर पड़े असर के कारण इन मछुआरों का निकलना फिलहाल संभव नहीं हो पा रहा है।

तमिलनाडु मत्स्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य के लगभग 593 मछुआरे इस समय ईरान और उसके आसपास के देशों में काम कर रहे हैं। इनमें से अधिकतर मछुआरे कन्याकुमारी, तूतीकोरिन, तिरुनेलवेली, रामनाथपुरम और कडलूर जैसे तटीय जिलों से हैं। इन इलाकों में मछली पकड़ने से जुड़ा काम कई परिवारों के लिए आजीविका का एक बड़ा साधन बन चुका है।

अधिकारियों का कहना है कि अब तक वहां से मछुआरों की ओर से कोई सीधी संकट कॉल (डिस्ट्रेस कॉल) नहीं आई है, लेकिन उनके परिवारों ने बढ़ते तनाव और युद्ध की खबरों के बीच उनकी सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई है।

एक मत्स्य विभाग अधिकारी ने बताया, "अब तक हमें मछुआरों की ओर से मदद की कोई सीधे गुहार नहीं मिली है। केवल उनके परिवारों ने चिंता व्यक्त की है। राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और अपनी क्षमता के अनुसार हरसंभव कदम उठा रही है।"

हालात इसलिए और मुश्किल हो गए हैं क्योंकि युद्ध की स्थिति को देखते हुए ईरान सरकार ने अस्थायी रूप से अपने बंदरगाह और हवाई अड्डे बंद कर दिए हैं। इससे लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई है। ऐसे में फिलहाल वहां से लोगों को निकालने के लिए किसी तरह का निकासी अभियान चलाना संभव नहीं है।

इस बीच, ईरान में मौजूद भारतीय दूतावास भारतीय नागरिकों की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और उन्हें जरूरी सहायता उपलब्ध करा रहा है। दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर और ई-मेल भी जारी किए हैं, ताकि वहां फंसे भारतीय उनसे संपर्क कर सकें और जरूरत पड़ने पर मदद मिल सके।

यह मामला अब अदालत तक भी पहुंच गया है। कन्याकुमारी जिले के दो मछुआरों आर. सहाया जेनिश राज और जे. जुडेलिन के परिजनों ने मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ में याचिका दायर की है।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि हवाई और समुद्री रास्ते बंद होने के कारण फिलहाल निकासी संभव नहीं है, लेकिन ईरान स्थित भारतीय दूतावास वहां फंसे भारतीयों को जरूरी मदद दे रहा है। अदालत ने इस बयान को रिकॉर्ड में लेते हुए याचिकाओं का निपटारा कर दिया और याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे मछुआरों का पूरा विवरण दूतावास को उपलब्ध कराएं।

इधर, तिरुनेलवेली से सांसद सी. रॉबर्ट ब्रूस ने नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात कर इडिंथाकराई गांव के 43 मछुआरों को सुरक्षित वापस लाने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
 

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