मंगलुरु, 11 मार्च। मंगलुरु साइबर क्राइम पुलिस ने विदेशी संचालकों से जुड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क के लिए कथित तौर पर लोगों से बैंक खाते इकट्ठा करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग ट्रेडिंग बिजनेस के नाम पर आम लोगों से बैंक खाते लेते थे और बाद में उन खातों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के लिए किया जाता था।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन, 18 डेबिट कार्ड, 17 बैंक पासबुक, छह चेक बुक, 1,479.31 यूनिट यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी और एक मारुति कार जब्त की है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद अनीश (30), पुत्र अब्दुल खादर, निवासी कसाबा बेंगरे, कुलूर पोस्ट, और सलीथ अहमद एम. (32), पुत्र अहमद मुस्तफा, निवासी सातवां ब्लॉक, सुरथकल, दोनों मैंगलुरु के निवासी, के रूप में हुई है।
इन गिरफ्तारियों को मैंगलुरु सिटी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले के सिलसिले में अंजाम दिया गया। मामला सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(सी) और 66(डी) तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 308(5), 318(4), 319(2) और 3(5) के तहत दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब मंगलुरु शहर के निवासी मोहम्मद सिनान ने 10 मार्च को शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनके परिचित मोहम्मद अनीश और सलीथ अहमद ने ट्रेडिंग बिजनेस के लिए उनके बैंक खाते की जानकारी ली थी, लेकिन बाद में उसी खाते का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी गतिविधियों के लिए किया गया।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्य जुटाए गए और उनका विश्लेषण किया गया, जिसके बाद आरोपियों को मंगलुरु में ट्रेस कर हिरासत में लिया गया।
पुलिस का कहना है कि जांच में पता चला है कि आरोपी लोगों से कई बैंक खाते इकट्ठा कर उन्हें साइबर फ्रॉड ऑपरेशन में इस्तेमाल करते थे।
जांचकर्ताओं के मुताबिक आरोपी भारत में व्यक्तियों से कम कीमत पर यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी खरीदते थे और बाद में व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए बने संपर्कों के माध्यम से चीन स्थित साइबर ठगों को अधिक कीमत पर बेच देते थे।
बताया गया है कि चीनी साइबर ठग भारतीय नागरिकों के साथ किए गए साइबर अपराध से प्राप्त धनराशि को आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों में ट्रांसफर करते थे।
इन लेन-देन को आसान बनाने के लिए आरोपी मंगलुरु शहर के लोगों से बैंक खाते जुटाते थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों को पूरी तरह पता था कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा है।
जब भी इन बैंक खातों के खिलाफ शिकायत दर्ज होती और बैंक उन्हें फ्रीज कर देते, तो आरोपी नए बैंक खाते जुटाकर अपनी धोखाधड़ी की गतिविधियां जारी रखते थे।
पुलिस द्वारा जब्त मोबाइल फोन की जांच और पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों ने मंगलुरु शहर और आसपास के इलाकों से 70 से अधिक बैंक खाते जुटाए थे।
इनमें से 37 बैंक खातों की शिकायत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज है और देश के विभिन्न हिस्सों से 88 से अधिक शिकायतें सामने आई हैं।
पुलिस ने बताया कि बैंक खातों के जरिए हुए वित्तीय लेन-देन का पता लगाने और इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान के लिए आगे की जांच जारी है।