पश्चिम एशिया में गहराया संकट, पूर्व राजनयिक वीना सीकरी की चेतावनी: मानवीय-आर्थिक प्रभाव दूरगामी, हालात गंभीर होते जा रहे

पश्चिम एशिया की स्थिति बिगड़ती जा रही है : पूर्व राजनयिक वीना सीकरी


नई दिल्ली, 11 मार्च। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। भारत की पूर्व राजनयिक और बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीना सिकरी ने बुधवार को इस स्थिति को बेहद गंभीर बताया।

उन्होंने आईएएनएस से कहा कि यह संकट लगातार गहराता जा रहा है और इसके मानवीय व आर्थिक प्रभाव दूरगामी हो सकते हैं, हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए यह संकट जल्द समाप्त हो सकता है।

वीना सिकरी ने कहा कि क्षेत्र में अब तक बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। यह बहुत गंभीर स्थिति है और लगातार खराब होती जा रही है। हमने पहले ही बड़ी संख्या में लोगों की मौत और बुनियादी ढांचे की व्यापक तबाही देखी है। कई खाड़ी देश इस संघर्ष से प्रभावित हुए हैं और अब इसका आर्थिक असर भी सामने आने लगा है।

उन्होंने बताया कि इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ने लगा है। ऊर्जा उत्पादन और सप्लाई चेन में आई बाधाओं का सीधा असर उन देशों पर पड़ेगा जो ईंधन और गैस के आयात पर निर्भर हैं।

उन्होंने कहा, "एलएनजी की कीमतें बढ़ रही हैं और खबर है कि कतर ने फिलहाल उत्पादन रोक दिया है। ऐसे में हर देश को अपने स्तर पर व्यवस्था करनी होगी ताकि लोगों को ईंधन और खाना पकाने वाली गैस मिलती रहे। इसी के साथ पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ रही हैं और आगे और बढ़ सकती हैं।"

सिकरी ने चेतावनी दी कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक जारी रहती है तो इसका व्यापक आर्थिक असर हो सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर की सरकारों को इस संकट के प्रभाव को संभालने के लिए सावधानी से कदम उठाने होंगे।

वीना सीकरी ने यह भी भरोसा जताया कि वैश्विक नेताओं के कूटनीतिक प्रयास तनाव कम करने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "हमारे प्रधानमंत्री लगातार विश्व नेताओं के संपर्क में हैं और मुझे उम्मीद है कि बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान निकलेगा। अलग-अलग स्तर पर कई चर्चाएं चल रही हैं।"

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए वीना सिकरी ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया है कि यह संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है।

उन्होंने कहा, "डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह स्थिति बहुत जल्द समाप्त हो सकती है। अब हमें इंतजार करना होगा कि आगे क्या होता है। लेकिन इतना जरूर है कि यह संघर्ष खत्म होना चाहिए, क्योंकि पहले ही बहुत ज्यादा जानें जा चुकी हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि मानवीय नुकसान के अलावा यह संकट अब वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करने लगा है।

सिकरी ने कहा, "इसका गंभीर आर्थिक प्रभाव पड़ रहा है। अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चलता रहा तो दुनिया मंदी की ओर भी जा सकती है। इसलिए यह स्थिति बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है और शांति प्रयासों का सफल होना बेहद जरूरी है।"

इसी बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को राज्यसभा में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर स्वतः संज्ञान लेते हुए बयान दिया। उन्होंने इस संघर्ष को भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।

संसद में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि मौजूदा संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी से हुई, जिसमें एक तरफ इजरायल और अमेरिका हैं और दूसरी तरफ ईरान। इस टकराव का असर कई खाड़ी देशों तक पहुंच चुका है।

उन्होंने कहा कि इस हिंसा में कई लोगों की जान गई है, जिसमें ईरान के नेतृत्व से जुड़े कुछ लोग भी शामिल हैं, और क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। विदेश मंत्री ने बताया कि भारत ने संघर्ष के पहले ही दिन बयान जारी कर संयम बरतने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील की थी।

जयशंकर ने कहा, "हम मानते हैं कि तनाव कम करने और मूल समस्याओं का समाधान करने का एकमात्र रास्ता संवाद और कूटनीति ही है। सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए।"
 

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