पश्चिम बंगाल की 'गुस्ताखी' पर राज्यसभा में बवाल: राष्ट्रपति प्रोटोकॉल उल्लंघन 'संवैधानिक अपराध', ममता सरकार घेरे में

राज्यसभा में कहा, राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल का उल्लंघन केवल चूक नहीं संवैधानिक अपराध है


नई दिल्ली, 11 मार्च। पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के आगमन पर राज्य सरकार द्वारा किए गए व्यवहार का विषय बुधवार को राज्यसभा में उठाया गया। यहां स्पष्ट तौर पर कहा गया कि पश्चिम बंगाल की इस गुस्ताखी को माफ नहीं किया जा सकता। भाजपा सांसद ने इस मामले पर कहा कि राष्ट्रपति पद किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि सभी 140 करोड़ भारतीयों के गौरव का प्रतीक है।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति की पश्चिम बंगाल यात्रा के दौरान राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, संबंधित वरिष्ठ अधिकारी व अन्य व्यक्ति राष्ट्रपति के स्वागत और विदाई के लिए उपस्थित नहीं थे। बुधवार को यह विषय भाजपा सांसद बाबूराम निषाद ने सदन के भीतर उठाया। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य निषाद ने कहा कि वह आज एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय की ओर सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि यह विषय किसी दल या राजनीति से ऊपर है। यह विषय भारत के राष्ट्रपति की गरिमा और हमारे संविधान की आत्मा से संबंधित है। निषाद ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हाल ही में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के आगमन के दौरान जो प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है, वह केवल एक चूक नहीं बल्कि एक संवैधानिक अपराध है।

उन्होंने कहा कि जब एक राज्य सरकार जानबूझकर देश के सर्वोच्च पद की अवहेलना करती है, तो वह भूल जाती है कि वह संविधान की शपथ लेकर सत्ता में बैठी है। संविधान के अनुच्छेद 52 से 62 तक राष्ट्रपदों की व्याख्या की गई है। उन्होंने कहा कि ये राष्ट्रपद भारतीय गणराज्य के प्रतीक है। इन पदों का सम्मान करना सभी का कर्तव्य है।

भारतीय जनता पार्टी के सांसद ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार का यह आचरण अनुच्छेद 256 और 257 का भी उल्लंघन है। अनुच्छेद 256 और 257 यह कहते हैं कि राज्य सरकार केंद्र के निर्देशों और संवैधानिक समकों के प्रोटोकॉल के पालन के लिए बाध्य है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई राज्य सरकार जानबूझकर राष्ट्रपति या संवैधानिक प्रमुख के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करती है, तो उसे संवैधानिक तंत्र की विफलता मानकर अनुच्छेद 356 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।

गौरतलब है कि अनुच्छेद 356 के तहत कार्रवाई तब की जाती है जब राज्य सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुरूप काम करने में असमर्थ हो या राज्य संवैधानिक तंत्र विफल हो जाए। अनुच्छेद 356 के तहत राज्य सरकार को बर्खास्त किया जा सकता है।

बाबूराम निषाद ने राष्ट्रपति के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान राज्य सरकार के बर्ताव पर कहा कि ऐसी घटनाओं पर संबंधित राज्य के विवेकाधीन अधिकार में कटौती का प्रावधान हो। यही नहीं प्रोटोकॉल के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और मंत्रियों पर दंडनीय कार्रवाई व आपराधिक मुकदमा चलाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर आज बंगाल की इस गुस्ताखी को माफ किया गया तो कल अन्य राज्यों की भी सरकारें इसी राह पर चलेंगी। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि संविधान सर्वोपरि है। राष्ट्रपति पद किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के गौरव का प्रतीक है।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के पश्चिम बंगाल में अपमान का मामला लगातार गरमा रहा है। इस मामले को लेकर केंद्रीय गृह सचिव पहले ही पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से जवाब मांग चुके हैं। बंगाल के मुख्‍य सचिव से पूछा गया था कि आखिर नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया।

दरअसल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शनिवार को बागडोगरा एयरपोर्ट के पास आयोजित आदिवासी समुदाय के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके मंत्रियों की अनुपस्थिति का जिक्र किया था। साथ ही कार्यक्रम स्थल को स्थानांतरित करने के निर्णय पर भी सवाल उठाए थे। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अपमान मामले में केंद्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्‍य सचिव से से जवाब देने के लिए कहा था। साथ ही यह पूछा था कि राष्ट्रपति की यात्रा में नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया।
 

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