क्या भारतीय सेना अमेरिकी बख्तरबंद गाड़ियाँ खरीदेगी या अपने ही देश में बनी 'मेड इन इंडिया' तकनीक पर भरोसा जताएगी? इस बड़े सवाल पर Army Chief जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दो टूक जवाब देकर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।
उन्होंने साफ कर दिया है कि विदेशी हथियार सिर्फ एक 'विकल्प' हो सकते हैं, लेकिन हमारी 'प्राथमिकता' हमेशा स्वदेशी यानी Indigenous ही रहेगी।
सेना प्रमुख का यह बयान सिर्फ एक फैसला नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती ताकत का सबूत है। आइए, समझते हैं कि सेना क्या चाहती है और क्यों हमारा स्वदेशी WhAP (Wheeled Armoured Platform) अमेरिकी Stryker से इक्कीस साबित हो सकता है।
क्या कहा आर्मी चीफ ने?
Army Chief जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में Wheeled Armoured Vehicles की खरीद पर चल रही चर्चाओं को विराम देते हुए कहा, "अमेरिकी Stryker एक विकल्प जरूर है, लेकिन अगर हमारे पास सक्षम स्वदेशी समाधान मौजूद है, तो हम उसे ही चुनेंगे।"इसका सीधा मतलब है:
- सेना की पहली पसंद 'मेड इन इंडिया' है।
- विदेशी गाड़ियों पर विचार तभी होगा जब हमारी अपनी इंडस्ट्री समय पर डिलीवरी न दे पाए।
- भारत अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए किसी और देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
Stryker vs. WhAP: कौन है असली बाहुबली?
अमेरिकी Stryker का नाम बहुत बड़ा है, लेकिन जब आप इसकी तुलना भारत के DRDO और Tata द्वारा बनाए गए WhAP (Kestrel) से करते हैं, तो आपको भारतीय इंजीनियरिंग की ताकत समझ आएगी।| फीचर (Feature) | US Stryker (अमेरिका) | Indian WhAP (भारत - DRDO/Tata) |
|---|---|---|
| ताकत (Power) | इसका इंजन लगभग 350 HP की ताकत देता है। | यह 600 HP के दमदार इंजन के साथ आता है। |
| पानी में क्षमता (Amphibious) | यह पानी में नहीं तैर सकता (Non-amphibious)। | यह Amphibious है - यानी जमीन और पानी दोनों में मिशन को अंजाम दे सकता है। |
| पहाड़ों के लिए (High Altitude) | इसे लद्दाख जैसी ऊँचाई वाली जगहों के लिए मॉडिफाई करना पड़ेगा। | इसे खासतौर पर लद्दाख और सिक्किम जैसे High Altitude इलाकों के लिए ही डिजाइन किया गया है। |
| मेंटेनेंस | पार्ट्स के लिए अमेरिका पर निर्भर रहना होगा। | इसके पार्ट्स भारत में ही बनेंगे, कभी भी रिपेयर हो सकता है। |
ध्यान दें: भारतीय WhAP को Tata Advanced Systems और DRDO ने मिलकर तैयार किया है। इसमें Mahindra Defence जैसी अन्य भारतीय कंपनियाँ भी अपने स्वदेशी 8x8 वेहिकल्स के साथ मैदान में हैं।
भारत के लिए क्यों जरूरी है स्वदेशी कवच?
जनरल द्विवेदी का यह इशारा रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। जब हम अपना खुद का टैंक या बख्तरबंद गाड़ी (Armoured Vehicle) बनाते हैं, तो हमें कई फायदे मिलते हैं:- आजादी (Strategic Autonomy): युद्ध के समय हमें किसी देश के प्रतिबंधों का डर नहीं रहता।
- कस्टमाइजेशन (Customisation): हम अपनी जरूरत के हिसाब से उसमें भारतीय मिसाइलें और रडार लगा सकते हैं, जिसके लिए अमेरिका से इजाजत लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- पैसा देश में रहेगा: अरबों रुपये विदेश जाने के बजाय भारतीय कंपनियों (Tata, Mahindra, L&T) को मिलेंगे, जिससे देश में रोजगार बढ़ेगा।
निष्कर्ष
भारतीय सेना अब 'बायर' (Buyer) नहीं बल्कि 'मेकर' (Maker) बनने की राह पर है। WhAP (WhAP 8x8) के कड़े ट्रायल्स हो चुके हैं और यह साबित कर चुका है कि यह दुनिया की किसी भी बेहतरीन मशीन को टक्कर दे सकता है।Army Chief का यह बयान भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री के लिए एक 'ग्रीन सिग्नल' है कि अगर आप वर्ल्ड क्लास प्रोडक्ट बनाएंगे, तो सेना आपके साथ खड़ी है।