एलपीजी संकट पर केजरीवाल ने घेरा केंद्र को, पूछा - देश की जनता और कारोबारियों पर क्यों पड़ रही है यह मार

एलपीजी गैस संकट को लेकर अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने केंद्र पर उठाए सवाल


नई दिल्ली, 10 मार्च। देश में एलपीजी गैस की आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आम आदमी पार्टी (आप) ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि देश में एलपीजी गैस का संकट बढ़ता जा रहा है, और इसकी मार आम जनता के साथ-साथ छोटे कारोबारियों को भी झेलनी पड़ रही है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सरकार की चुप्पी की सजा देश की जनता भुगत रही है। केजरीवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखने लगा है। हाल ही में घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में करीब 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा कई कमर्शियल संस्थानों को एलपीजी गैस की आपूर्ति रोकने के फैसले से चिंता और बढ़ गई है। उनके अनुसार, सरकार ने अब केवल घरेलू उपभोक्ताओं, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को गैस की आपूर्ति जारी रखने का निर्णय लिया है, जबकि बाकी कमर्शियल संस्थानों को फिलहाल गैस नहीं दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में गैस और तेल की स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस संकट पर स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए।

वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले तक सरकारी सूत्र यह दावा कर रहे थे कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है, लेकिन अब सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत गैस की आपूर्ति को नियंत्रित करना शुरू कर दिया है। रिफाइनरियों को गैस डायवर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं और घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच का अंतराल भी 25 दिन कर दिया गया है।

सिसोदिया ने सवाल उठाया कि यदि देश में गैस की कमी नहीं थी, तो अब सरकार को आपूर्ति नियंत्रित करने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब भारत की रसोई और रोजगार तक पहुंच चुका है। होटल, ढाबे, छोटे रेस्टोरेंट और अन्य छोटे कारोबार कमर्शियल गैस की कमी से जूझ रहे हैं, जिससे लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने केंद्र सरकार से पारदर्शिता बरतने और देश के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे आम जनता और छोटे व्यवसायों पर पड़ रहे इस संकट का प्रभाव कम किया जा सके।
 

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