रायसेन किले से अवैध तोप चलाने पर NHRC सख्त, 2 हफ्ते में मांगी एक्शन रिपोर्ट; देश-विरोधी नारों पर भी जांच

ऐतिहासिक रायसेन किले से अवैध तोप चलाने का एनएचआरसी ने संज्ञान लिया, 2 सप्ताह में मांगी एटीआर


नई दिल्ली, 10 मार्च। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में ऐतिहासिक रायसेन किले से अवैध तोप चलाने की शिकायत पर तुरंत संज्ञान लिया है। इस मामले में आयोग ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है।

यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से जुड़ी है, जिसमें कुछ युवक किले की प्राचीर से देसी तोप दागते दिख रहे हैं, साथ ही भड़काऊ नारे लगाते हुए ईरान के समर्थन में बयान देते नजर आ रहे हैं।

रायसेन किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि बिना अनुमति के तोप चलाने से वाइब्रेशन और शोर के कारण पुरानी इमारतों को नुकसान पहुंच रहा है। वीडियो में दिख रहे युवकों द्वारा दूसरे देशों का समर्थन करते हुए दिए गए बयान राष्ट्रीय सुरक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। शिकायत में हाई-लेवल जांच, तोप के इस्तेमाल पर तत्काल रोक, शामिल युवकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और हथियार पहुंच प्रदान करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।

एनएचआरसी की बेंच, जिसकी अध्यक्षता माननीय सदस्य प्रियांक कानूनगो कर रहे हैं, ने प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट्स एक्ट, 1993 की धारा 12 के तहत इस मामले में संज्ञान लिया। आयोग ने जिला कलेक्टर (डीएम), पुलिस अधीक्षक (एसपी) रायसेन, क्षेत्रीय निदेशक एएसआई भोपाल और संस्कृति मंत्रालय के सचिव, भारत सरकार को नोटिस जारी किया है। इन अधिकारियों को आरोपों की जांच कर दो सप्ताह में रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट की एक प्रति ई-मेल पर भी भेजने को कहा गया है।

यह घटना रमजान के दौरान इफ्तार या सहरी के संकेत के लिए पारंपरिक तोप चलाने से जुड़ी बताई जा रही है, लेकिन वीडियो में नारे और दिशा (रिहायशी इलाके की ओर) ने विवाद बढ़ा दिया। पुलिस ने वीडियो वायरल होने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए चार युवकों, शादाब कुरैशी, यूसुफ शेख, वसीम मोहम्मद और सलमान कुरैशी, को गिरफ्तार किया है। मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196(1)(ए) के तहत दर्ज किया गया, जिसमें धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप है। पुलिस जांच में अन्य संलिप्त लोगों की तलाश जारी है।

एनएचआरसी सदस्य प्रियांक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि एएसआई संरक्षित किले से अवैध देसी तोप चलाकर जनजीवन को खतरे में डाला जा रहा है और ईरान-रमजान के नाम पर भय फैलाया जा रहा है। उन्होंने एएसआई और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए गैर-कानूनी हथियार बनाने, गोला-बारूद चलाने और दहशत फैलाने के लिए सख्त कार्रवाई की मांग की।

यह मामला ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव के बीच संतुलन की चुनौती को उजागर करता है। एएसआई नियमों के तहत संरक्षित स्मारकों पर किसी भी विस्फोटक या हथियार के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी है, जो विरासत को नुकसान पहुंचा सकता है। एनएचआरसी की जांच से मामले की गहराई से पड़ताल होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए दिशानिर्देश बन सकते हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी निष्पक्षता से की जा रही है और दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई होगी।
 

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