राजद की बैठक में AIMIM को न्योता नहीं! अख्तरुल ईमान बोले- हमारा दरवाजा हमेशा खुला है

एआईएमआईएम का दरवाजा हमेशा खुला रहता है, राजद की बैठक की कोई खबर नहीं: अख्तरुल ईमान


पटना, 10 मार्च। बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए छह प्रत्याशियों के मैदान में उतर जाने के बाद मतदान होना तय है। इस बीच, राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मंगलवार को महागठबंधन के नेताओं की बैठक बुलाई है, लेकिन इसमें एआईएमआईएम के लोगों को नहीं बुलाया गया है।

इधर, एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने मंगलवार को कहा कि उन्हें (राजद) हमारी जरूरत नहीं होगी। राजद के लोग अपने लोगों को लेकर बैठ रहे हैं, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। उन्होंने राज्यसभा चुनाव में समर्थन को लेकर साफ लहजे में कहा कि अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। विचार चल रहा है। तेजस्वी यादव को जब हमारी जरूरत पड़ेगी तब हम फैसला करेंगे कि हमें जाना है या नहीं।

तेजस्वी यादव से पहले की मुलाकात को लेकर उन्होंने कहा कि मुलाकात हुई थी। उनकी इच्छा थी कि हमलोग उनका समर्थन करें, लेकिन हमारी ख्वाइश थी कि वे हमारे उम्मीदवार का समर्थन करें, क्योंकि उच्च सदन में हमारा कोई प्रतिनिधि नहीं है।

समर्थन देने को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि कल का मौसम कैसा होगा, वह तो देख कर निर्णय लिया जाएगा। अगर बारिश हुई तो छाता लेकर निकल जाऊंगा। उन्होंने राजद को नसीहत देते हुए कहा कि यह जमाना है विचार कर चलने का। जो सक्षम हैं, उन्हें विचार करने की कोई जरूरत नहीं है।

राज्यसभा चुनाव में एआईएमआईएम के विधायकों के अहम होने को लेकर कहा कि जिनके लिए हम अहम होंगे, तब न कुछ होगा। दोनों गठबंधनों की ओर से कोई संपर्क नहीं किया गया है। हमलोग प्रत्याशी बनाना चाहते थे, कोई सहयोग नहीं किया। उन्होंने कहा, "हमलोगों का दिल और दरवाजा हमेशा खुला रहता है। हमलोग समाजवादी विचार के लोग हैं। हमलोग अडिग और घमंडी नहीं हैं।"

दरअसल, बिहार में एनडीए ने राज्यसभा चुनाव में पांच, जबकि राजद ने एक प्रत्याशी उतारे हैं। बिहार के राज्यसभा सदस्य जिनका कार्यकाल अप्रैल को समाप्त हो रहा है, उनमें अमरेंद्र धारी सिंह, प्रेमचंद गुप्ता, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा एवं राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह हैं।

आंकड़ों पर गौर करें तो 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए। अभी एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं। इसके आधार पर, एनडीए आसानी से चार सीटें जीत सकता है। चार सीटें जीतने के बाद भी उसके पास कुछ वोट बचे हैं, लेकिन पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे अन्य विधायकों की जरूरत पड़ेगी।

विपक्षी खेमे में राष्ट्रीय जनता दल की अगुवाई वाला महागठबंधन है। महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं। इसे एक सीट पर जीत दर्ज करने के लिए अन्य विधायकों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में बसपा के एक विधायक, एआईएमआईएम के पांच विधायकों का समर्थन मिल जाए तो यह संख्या 41 तक पहुंच सकती है, जो जीत के लिए जरूरी आंकड़ा है। यही वजह है कि इस चुनाव में इसकी भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।
 

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