मंदिर संपत्तियों की सुरक्षा के लिए कानून बनाए केरल सरकार: हाईकोर्ट

मंदिर संपत्तियों की सुरक्षा के लिए कानून बनाए केरल सरकार: हाईकोर्ट


एर्नाकुलम, 12 जनवरी। केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार को मंदिरों की संपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए एक व्यापक कानून लाने का सुझाव दिया। कोर्ट ने कहा कि मंदिर संपत्तियों से जुड़े मामलों में लापरवाही और गबन पर सख्त दंडात्मक प्रावधान होने चाहिए।

यह टिप्पणी सबरीमाला मंदिर में सोने की कथित चोरी से जुड़े मामले में जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की गई। इस मामले ने मंदिर संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने पूर्व त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) अध्यक्ष ए. पद्मकुमार, पूर्व टीडीबी अधिकारी मुरारी बाबू और जौहरी गोवर्धनन की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह सुझाव दिया। ये सभी आरोपी सबरीमाला मंदिर के द्वारपालक मूर्तियों और दरवाजों के फ्रेम से सोना गबन किए जाने के आरोप में न्यायिक हिरासत में हैं।

अदालत ने अतिरिक्त महानिदेशक अभियोजन (एडीजीपी) से सवाल किया कि राज्य मंदिर संपत्तियों की रक्षा के लिए कोई विशेष कानून क्यों नहीं ला सकता। न्यायालय ने इसे अस्थायी तौर पर “केरल स्टेट देवस्वोम प्रॉपर्टीज प्रोटेक्शन एंड प्रिजर्वेशन एक्ट” नाम देने का भी सुझाव दिया, ताकि मंदिर संपत्तियों से जुड़े उल्लंघनों को आपराधिक अपराध की श्रेणी में लाया जा सके।

न्यायमूर्ति बदरुद्दीन ने कहा कि देवस्वोम मैनुअल में कर्तव्यों और प्रक्रियाओं का उल्लेख है, लेकिन उसके उल्लंघन पर केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है, इसे आपराधिक अपराध नहीं माना जाता। उन्होंने कहा, “बड़ी संपत्ति वाले मंदिरों में गबन के कई मामले सामने आ रहे हैं। जिन लोगों को इन संपत्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, उनका श्रद्धालुओं के प्रति दायित्व है। इसके लिए कानून जरूरी है।”

कोर्ट ने एडीजीपी से इस मुद्दे पर वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर सरकार के समक्ष सिफारिश रखने को कहा। साथ ही, जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

इस मामले में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सभी न्यायिक हिरासत में हैं। केरल हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) इस मामले की जांच कर रहा है और दो अलग-अलग चार्जशीट में 15 लोगों के नाम शामिल किए गए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी जांच में कूद पड़ा है। केरल सरकार के विरोध के बावजूद एक स्थानीय अदालत ने एसआईटी को ईडी के साथ मामले से जुड़े सभी दस्तावेज साझा करने का निर्देश दिया। ईडी ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत भी केस दर्ज कर लिया है।

इसके अलावा, राज्य भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर की ओर से दायर याचिका पर सबरीमाला सोना चोरी मामले की सीबीआई जांच को लेकर भी केरल हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है।
 
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