नई दिल्ली, 9 मार्च। गर्मी के मौसम में बच्चे हों या बड़े… भुट्टे (कॉर्न) हर किसी को पसंद आते हैं। लेकिन आजकल बाजार में भुट्टों को ज्यादा आकर्षक और लंबे समय तक ताजा दिखाने के लिए कई केमिकल्स और प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल किया जाता है। इससे न सिर्फ स्वाद में फर्क आता है, बल्कि ये पेट दर्द, एलर्जी और कभी‑कभी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन जाते हैं, इसलिए भुट्टे की पहचान करना बेहद जरूरी है।
सबसे पहले, भुट्टे के दानों का रंग और चमक देखना जरूरी है। प्राकृतिक भुट्टे के दाने हल्के पीले और मैट फिनिश वाले होते हैं। अगर भुट्टे के दाने असामान्य रूप से ज्यादा चमकदार और बिल्कुल एक जैसे दिखें, तो सावधानी बरतें। यह संकेत हो सकता है कि उन्हें लंबे समय तक ताजा दिखाने के लिए किसी तरह के केमिकल्स या प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल किया गया है।
भुट्टे की महक भी पहचान का एक तरीका हो सकती है। ताजगी और प्राकृतिकता का पता भुट्टे की हल्की मिट्टी जैसी खुशबू से चलता है। अगर आपको कोई तेज या रसायन जैसी गंध महसूस हो, तो वह भुट्टा सुरक्षित नहीं है। कभी‑कभी केमिकल्स से हल्की बदबू आती है, जो प्राकृतिक भुट्टे में नहीं होती। इसलिए इसे खरीदने से बचना ही बेहतर होता है।
भुट्टे की पत्तियों की स्थिति भी सुरक्षा का संकेत देती है। असली भुट्टे की हरी पत्तियां हल्की सूखी या पीली हो सकती हैं और उनमें थोड़ी प्राकृतिक झुर्रियां होती हैं। वहीं, अगर पत्तियां पूरी तरह चमकदार जैसी दिखें, तो यह संकेत हो सकता है कि भुट्टे को लंबे समय तक स्टोर करने या आकर्षक दिखाने के लिए कुछ रसायन लगाया गया है।
दानों की बनावट भी महत्वपूर्ण है। ताजा भुट्टे के दाने हल्के, मुलायम और दूधिया रस से भरपूर होते हैं। अगर दाने बहुत सख्त या असामान्य रूप से कड़े हों, तो यह पुराने भुट्टे या केमिकल ट्रीटमेंट का परिणाम हो सकता है। ऐसे भुट्टे स्वाद में फीके और पाचन के लिए नुकसानदायक होते हैं, इसलिए खरीदते समय दानों को हल्का दबाकर जांचना चाहिए।