मुंबई, 9 मार्च। सोमवार को अमेरिकी डॉलर मजबूत होने और महंगाई की आशंकाओं के कारण कीमती धातुओं यानी सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखी गई, जिससे निकट भविष्य में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हो गईं।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए उम्मीद की जा रही थी कि सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतें और बढ़ेंगी। लेकिन इसके उलट इनके दाम में गिरावट देखने को मिली है।
सोमवार को दिन के कारोबार में एमसीएक्स पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना वायदा गिरकर 1,59,826 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया, तो वहीं मई डिलीवरी वाली चांदी वायदा गिरकर 2,60,743 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गई।
खबर लिखे जाने तक (दोपहर करीब 12.18 बजे) एमसीएक्स पर 2 अप्रैल एक्सपायरी वाला गोल्ड कान्ट्रैक्ट 881 रुपए यानी 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,60,678 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता नजर आया। वहीं, एमसीएक्स पर 5 मई एक्सपायरी वाला सिल्वर कान्ट्रैक्ट 3,378 रुपए यानी 1.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,64,907 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा था।
इस बीच अमेरिकी डॉलर मजबूत होकर तीन महीने के उच्च स्तर 99.34 तक पहुंच गया, जो इंट्राडे आधार पर लगभग 0.36 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। डॉलर के मजबूत होने से अन्य मुद्राओं के निवेशकों के लिए सोना और चांदी खरीदना महंगा हो जाता है।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड भी बढ़ गई है और 10 साल के बॉन्ड की यील्ड एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। इससे बिना ब्याज देने वाली धातुओं जैसे सोने और चांदी को रखने की लागत बढ़ जाती है।
इसी दौरान कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया है। तेल की कीमत लगभग 27 प्रतिशत बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो 2022 के बाद पहली बार है जब दोनों प्रमुख तेल मानक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गए हैं। यह तेजी मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के कारण आई है।
तेल की कीमतों में इस उछाल से महंगाई बढ़ने की आशंका बढ़ गई है, जिसके चलते बाजार में यह उम्मीद बढ़ रही है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व 18 मार्च को होने वाली दो दिवसीय नीति बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है।
बाजार के अनुमान के अनुसार, जून में भी फेड के ब्याज दरों को बिना बदलाव के रखने की संभावना 51 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जो पिछले सप्ताह 43 प्रतिशत से कम थी।
विश्लेषकों का कहना है कि सोने के लिए 1,48,000 रुपए का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 1,53,000 रुपए का स्तर रेजिस्टेंस हो सकता है।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में 5,000 डॉलर के आसपास मजबूत खरीदारी देखी जा रही है। अगर कीमतें 5,400 से 5,600 डॉलर के ऊपर स्थिर रहती हैं, तो सोना नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि उतार-चढ़ाव के बावजूद चांदी का मध्यम और लंबी अवधि का दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है, क्योंकि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां और बाजार के संकेत इसके पक्ष में हैं।