काशीपुर के प्राचीन शीतला मंदिर में बसौड़ा पर्व पर भक्तों का सैलाब, मां के दर्शनों से हुआ मन शीतल

काशीपुर: प्राचीन शीतला मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, बसौड़ा पर्व पर भक्तों ने किए दर्शन


काशीपुर, 9 मार्च। रंगों के त्योहार होली के ठीक एक हफ्ते बाद मनाए जाने वाले बसौड़ा पर्व (शीतला अष्टमी) को लेकर काशीपुर में भक्तों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। प्राचीन सिद्ध पीठ श्री शीतला माता मंदिर में चैत्र मास की द्वितीया तिथि से शुरू हुई विशेष पूजा-अर्चना का सिलसिला आज भी जारी रहा।

आज सुबह से ही सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और मां शीतला देवी की पूजा-अर्चना कर प्रसाद चढ़ाया। मंदिर के बाहर दोनों तरफ लंबी कतारें लगी रहीं, जहां भक्त अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।

मंदिर के प्रबंधक पंडित संदीप मिश्रा ने बताया कि मां शीतला को रोग हरण अवतारी माना जाता है। इन्हें नगर कोट देवी, महाकाली, तृष्णा, कालरात्रि, श्री चौगानन चौराहे वाली और मसानी माता के नाम से भी जाना जाता है। ऋतु परिवर्तन से होने वाली बीमारियों से मुक्ति के लिए प्रतिवर्ष चैत्र मास की द्वितीया से यहां विशेष पूजा का प्रावधान है। भक्त बड़ी संख्या में यहां जुटते हैं और मां को हल्दी का तिलक लगाते हैं और नारियल, कच्चा दूध, चना, चना दाल, मसूर दाल, हल्दी, गुड़, आटा, पुए, सरसों का तेल, नमक समेत अन्य पूजन सामग्री चढ़ाते हैं।

धार्मिक मान्यता है कि बसौड़ा पूजन से घर में रोग-व्याधि दूर होती है और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। पंडित संदीप मिश्रा ने बताया, “सुबह 5 बजे से ही दर्शन का तांता लगा हुआ है। होली के अगले दिन से वैशाखी तक सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को पूजा होती है। शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी (बसौड़ा) पर विशेष पूजन का प्रावधान है। दर्शन करने से माता कष्टों का निवारण कर रोगों का नाश करती हैं।”

उन्होंने बताया कि बसौड़ा पूजन 10 और 11 मार्च को है, लेकिन सोमवार होने के कारण आज भी भारी भीड़ रही। कई भक्त एक हफ्ते तक लगातार प्रसाद चढ़ाते हैं। मंदिर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए व्यवस्था की गई है। भक्तों को सुचारु रूप से दर्शन और प्रसाद चढ़ाने का मौका मिल रहा है। बसौड़ा पर्व स्वास्थ्य, स्वच्छता और रोग निवारण का प्रतीक है, जो बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है।
 

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