नालंदा, 9 मार्च। राजगीर जू सफारी आने वाले पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। पटना जू से एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत लाए गए दुर्लभ सफेद बाघ 'केसरी' को अब आधिकारिक तौर पर खुले एन्क्लोजर (बाड़े) में छोड़ दिया गया है। इसके साथ ही सैलानी अब सफारी की सुरक्षित गाड़ियों में बैठकर खुले जंगल जैसे माहौल में इस आकर्षक सफेद बाघ का करीब से दीदार कर सकेंगे।
सफेद बाघ के आगमन से राजगीर जू सफारी का रोमांच कई गुना बढ़ गया है और यहां आने वाले पर्यटकों के बीच इसे देखने को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। सफेद बाघ के सफारी में आने से पर्यटकों, खासकर बच्चों और वन्यजीव प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। खुले वातावरण में उसकी दूधिया सफेद काया और दमदार दहाड़ लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बन गई है। सफारी वाहन से सुरक्षित दूरी पर रहते हुए पर्यटक इस दुर्लभ बाघ को खुले जंगल में घूमते हुए देख रहे हैं और इस रोमांचक अनुभव को अपने कैमरों में कैद कर रहे हैं। कई सैलानी इसे अपने जीवन का अनोखा और यादगार अनुभव बता रहे हैं।
जू सफारी के निदेशक रामसुंदर एम ने बताया कि सफेद बाघ 'केसरी' का राजगीर जू सफारी में आना बेहद गर्व का क्षण है। उन्होंने बताया कि कुछ दिनों तक गहन अवलोकन (ऑब्जर्वेशन) करने के बाद यह पाया गया कि केसरी यहां की जलवायु और वातावरण में पूरी तरह से ढल चुका है। उन्होंने कहा कि बाघ के लिए ऐसा बाड़ा तैयार किया गया है जो उसके प्राकृतिक आवास जैसा ही है, ताकि वह बिना किसी तनाव के सामान्य तरीके से रह सके। यही कारण है कि अब उसे खुले एन्क्लोजर में छोड़ दिया गया है, जहां पर्यटक सुरक्षित दूरी से उसका दीदार कर सकेंगे।
निदेशक ने आगे बताया कि जू सफारी परिसर को पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) डिजाइन किया गया है। वन्यजीवों और पर्यटकों दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बाड़े के आसपास अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सफारी के वाहन भी पूरी तरह सुरक्षित हैं, जिनमें बैठकर पर्यटक बिना किसी डर के जंगल जैसे वातावरण में बाघ को अपने करीब से गुजरते हुए देख सकते हैं। अधिकारियों का मानना है कि केसरी के आने से जू सफारी की लोकप्रियता और भी बढ़ेगी और इससे बिहार के पर्यटन को नई पहचान मिलेगी।
आपको बताते चलें, राजगीर जू सफारी में फिलहाल 10 शेर, 5 भालू, 4 तेंदुए, 4 बाघ और लगभग 250 हिरण हैं।