नई दिल्ली, 9 मार्च। मिडिल ईस्ट में इस वक्त हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने ईरान की तरफ से जारी हमलों पर अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने न्यूजीलैंड के लोगों को अपने देश वापस लौटने के लिए कमर्शियल फ्लाइट लेने की सलाह दी है, जो फिर से शुरू हो गई है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा, "मिडिल ईस्ट में लड़ाई न्यूजीलैंड के कई लोगों के लिए चिंता की बात है और आज मैं आपको अपडेट करना चाहता था कि सरकार क्या कर रही है और इस मुश्किल समय का आपके लिए क्या मतलब हो सकता है। जाहिर है, हमारी पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कीवी सुरक्षित रहें और हम जानते हैं कि मिडिल ईस्ट में न्यूजीलैंड के लोग परेशान और अनिश्चित महसूस कर रहे होंगे। इसलिए जहां यह सुरक्षित है और ऐसा करना मुमकिन है, हम न्यूजीलैंड के उन लोगों को बढ़ावा देते हैं जो घर आना चाहते हैं कि वे कुछ शहरों से फिर से शुरू हो रही कमर्शियल फ्लाइट लें।"
उन्होंने आगे कहा कि हमने मिडिल ईस्ट इलाके में लड़ाई में फंसे न्यूजीलैंड के नागरिकों को निकालने में, अगर जरूरत पड़ी तो मदद के लिए आरएनजेडएएफ हरक्यूलिस एयरक्राफ्ट भी तैयार रखे हैं। सरकार इस इलाके में न्यूजीलैंड के लोगों को ज्यादा कॉन्सुलर रिसोर्स देकर भी मदद करने की पूरी कोशिश कर रही है। बेशक, यहां घर पर आप लड़ाई के आर्थिक असर के बारे में चिंता करने लगे होंगे और यह काफी समझ में आता है।
पीएम लक्सन ने आगे कहा, "हम पहले से ही पेट्रोल की कीमत में बढ़ोतरी देख रहे हैं, लेकिन हमारे लिए लंबे समय में कीमत का असर, बेशक, लड़ाई के समय पर निर्भर करेगा। कैबिनेट ने आज इन आर्थिक असर पर करीब से नजर रखने के लिए एक मिनिस्टीरियल ओवरसाइट समूह बनाया है। मैं आपको भरोसा दिलाना चाहता हूं कि न्यूजीलैंड इस नई मुश्किल का सामना करने के लिए अच्छी स्थिति में है, क्योंकि हमने दो साल से ज्यादा समय बेसिक बातों पर ध्यान दिया है। ध्यान से खर्च किया है और महंगाई और अपने अकाउंट को कंट्रोल में रखा है।"
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई ऐसे समय में शुरू हुई, जब न्यूजीलैंड पहले ही एक लंबी मंदी से उभरना शुरू कर चुका था। अर्थव्यवस्था बढ़ रही है। हमारे बिजनेस और कंज्यूमर कॉन्फिडेंस के नंबर बढ़ रहे हैं और पर्यटन और एक्सपोर्ट भी बढ़ रहे हैं। दो साल पहले यह बहुत, बहुत ज्यादा मुश्किल स्थिति होती, जब महंगाई 7.3 फीसदी थी और इंटरेस्ट रेट ज्यादा थे। जब दुनिया अप्रत्याशित, अस्थिर और जिम्मेदार हो तो आर्थिक मैनेजमेंट सच में मायने रखता है।