वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, लेकिन भारत पर नहीं दिखेगा असर: सीतारमण का दावा, महंगाई काबू में

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का फिलहाल भारत पर नहीं कोई खास असर: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण


नई दिल्ली, 9 मार्च। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में कहा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का भारत में महंगाई की दर पर प्रभाव फिलहाल अधिक नहीं माना जा रहा है, क्योंकि देश की महंगाई "निम्नतम सीमा" के करीब है।

लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की कीमत पिछले एक वर्ष से लगातार गिर रही थी, जब तक 28 फरवरी, 2026 को पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संघर्ष शुरू नहीं हुए थे।

सीतारमण ने कहा,"फरवरी के अंत से लेकर 2 मार्च, 2026 तक कच्चे तेल की कीमत (भारतीय बास्केट) 69.01 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 80.16 डॉलर प्रति बैरल हो गई। चूंकि भारत में महंगाई अपने निचले स्तर के करीब है, इसलिए फिलहाल महंगाई पर इसका प्रभाव महत्वपूर्ण होने का अनुमान नहीं है।"

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर सैन्य हमले शुरू करने के बाद से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हो रही है। अब यह युद्ध मध्य पूर्व क्षेत्र में भी फैल गया है, क्योंकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इस क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं।

एक प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आरबीआई की अक्टूबर 2025 की मौद्रिक नीति रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि यदि कच्चे तेल की कीमतें आधारभूत अनुमानों से 10 प्रतिशत अधिक होती हैं, और घरेलू कीमतों पर इसका पूरा प्रभाव पड़ता है, तो महंगाई 30 आधार अंक तक बढ़ सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का महंगाई पर मध्यम अवधि का प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें विनिमय दर में उतार-चढ़ाव, वैश्विक मांग और आपूर्ति की स्थिति, मौद्रिक नीति का संचरण, सामान्य मुद्रास्फीति की स्थिति और अप्रत्यक्ष प्रभाव की सीमा शामिल हैं।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक द्वारा मापी गई औसत खुदरा मुद्रास्फीति (महंगाई) 2023-24 में 5.4 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 4.6 प्रतिशत और 2025-26 (अप्रैल-जनवरी) में और घटकर 1.8 प्रतिशत हो गई।

जनवरी 2026 के लिए मुख्य मुद्रास्फीति दर 2.75 प्रतिशत रही, जो आरबीआई के मुद्रास्फीति सहनशीलता बैंड (4 प्रतिशत से 2 प्रतिशत) की निचली सीमा के करीब है।

सीतारमण ने कहा कि मुद्रास्फीति प्रबंधन के तहत, मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने फरवरी 2025 से अब तक नीतिगत दर में संचयी रूप से 125 आधार अंक की कमी की है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आम नागरिक पर इसके प्रभाव को कम करने के लिए कई उपाय भी किए हैं। इनमें आवश्यक खाद्य पदार्थों के लिए बफर स्टॉक बढ़ाना, खुले बाजार में खरीदे गए अनाज की रणनीतिक बिक्री, आयात को सुगम बनाना और आपूर्ति की कमी के समय निर्यात पर प्रतिबंध लगाना शामिल है।

इसके अलावा, सरकार ने 12 लाख रुपए तक की वार्षिक आय (और वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए 12.75 लाख रुपए तक) को आयकर से छूट देने जैसे राजकोषीय कदम उठाए हैं ताकि मध्यम वर्ग के पास अधिक पैसा हो। साथ ही, उपभोक्ताओं के लिए वस्तुओं और सेवाओं को सस्ता बनाने के लिए जीएसटी दरों में भी कटौती की गई है।
 

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