नई दिल्ली, 9 मार्च। मानव शरीर सूक्ष्मजीवों का एक विशाल संसार है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'माइक्रोबायोम' कहा जाता है। यह मुख्य रूप से हमारी आंतों में रहने वाले बैक्टीरिया, वायरस, कवक (फंगस) और उनके जीन्स का एक जटिल संग्रह है। इन्हें केवल सूक्ष्मदर्शी (माइक्रोस्कोप) की सहायता से ही देखा जा सकता है। हमारे स्वास्थ्य में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये न केवल भोजन के पाचन में सहायक होते हैं, बल्कि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को सुदृढ़ कर शरीर को विभिन्न संक्रमणों और रोगों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायर्नमेंटल हेल्थ साइंस के अनुसार, माइक्रोबायोम से तात्पर्य आंतों के उन लाभकारी सूक्ष्मजीवों से है, जो स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं। ये अच्छे बैक्टीरिया पाचन सुधारते हैं, इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं, मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रखते हैं और मेटाबॉलिज्म को भी नियंत्रित करते हैं। ये फिट जीवनशैली के लिए आधार की तरह काम करते हैं, क्योंकि हेल्दी माइक्रोबायोम मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग, एलर्जी और सूजन वाली बीमारियों से भी बचाव में मददगार है।
माइक्रोबायोम जीवन की शुरुआत में बनता है और आहार, दवाओं, व्यायाम व पर्यावरण के साथ-साथ बदलता रहता है। ये सूक्ष्मजीव जटिल कार्बोहाइड्रेट और फाइबर को पचाते हैं, जिससे शॉर्ट-चेन फैटी एसिड (एससीएफए) बनते हैं। ये एससीएफए एनर्जी देते हैं, आंत की झिल्ली स्वस्थ रखते हैं और कैंसर जैसी गंभीर रोगों से बचाव करते हैं। अच्छे बैक्टीरिया रोगजनकों से लड़ते हैं और हानिकारक बैक्टीरिया को बढ़ने नहीं देते।
फिट रहने के लिए 'हिट' माइक्रोबायोम जरूरी है, जिससे पाचन बेहतर होता है, पोषक तत्व ज्यादा अवशोषित होते हैं और मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। स्वस्थ माइक्रोबायोम वजन नियंत्रण, एनर्जी लेवल और मूड सुधारता है।
आंतों के माइक्रोबायोम हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म पर गहरा असर डालते हैं। ये सूक्ष्मजीव कुछ पदार्थों को लाभकारी बनाते हैं, तो कुछ को हानिकारक। उदाहरण के लिए, जटिल कार्बोहाइड्रेट को ऐसे फैटी एसिड में बदलते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ यह क्षमता कम हो जाती है। वहीं, प्रोटीन और कुछ पोषक तत्वों को भी बदलने की क्षमता बढ़ जाती है, जो हृदय रोग और अन्य समस्याएं पैदा कर सकती हैं।
जीवन के विभिन्न चरणों में माइक्रोबायोम बदलता रहता है। इस पर हुए रिसर्च के अनुसार, कुछ मेटाबोलाइट्स जैसे 3-इंडॉक्सिल-सल्फेट बचपन में ज्यादा होते हैं, फिर कम हो जाते हैं, या यंग एज में बढ़कर फिर कम हो जाते हैं। ये मेटाबोलाइट्स मस्तिष्क के विकास और कार्य में भूमिका निभाते हैं। इसलिए, शुरुआती जीवन में पोषण और पर्यावरण का असर बाद की उम्र में बीमारियों के जोखिम को बढ़ा या घटा सकता है।
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार माइक्रोबायोम को बनाए रखने के लिए फाइबर युक्त भोजन जैसे फल, सब्जियां, साबुत अनाज लें। दही, छाछ जैसे प्रोबायोटिक्स अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाते हैं। व्यायाम नियमित करें। धीरे-धीरे फाइबर बढ़ाएं, ताकि गैस या ब्लोटिंग न हो। माइक्रोबायोम से इम्युनिटी मजबूत रहती है, बीमारियां कम होती हैं और फिटनेस आसान बनती है। वहीं, प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा चीनी और एंटीबायोटिक्स से परहेज करें। ये चीजें अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं।