रांची, 12 जनवरी। झारखंड की हजारों वर्ष पुरानी मेगालिथिक (वृहत पाषाण) संस्कृति अब वैश्विक मंच पर अपनी पहचान दर्ज कराने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार का प्रतिनिधिमंडल इस महीने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम और इसके बाद यूनाइटेड किंगडम की यात्रा के दौरान राज्य की प्राचीन पाषाण संरचनाओं, गुफा चित्रों और दुर्लभ भू-दृश्यों से जुड़े दस्तावेज अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने प्रस्तुत करेगा।
सरकार का उद्देश्य इन मेगालिथिक स्थलों को वैश्विक धरोहर के रूप में पहचान और संरक्षण दिलाने की दिशा में ठोस पहल करना है। झारखंड सरकार पहली बार वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की वार्षिक बैठक में भाग लेने जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल 18 जनवरी को झारखंड से रवाना होकर स्विट्जरलैंड के दावोस पहुंचेगा, जहां वह 26 जनवरी तक के अंतरराष्ट्रीय दौरे का हिस्सा रहेगा।
दावोस के बाद प्रतिनिधिमंडल यूनाइटेड किंगडम के लंदन और ऑक्सफोर्ड का दौरा करेगा। राज्य सरकार के जनसंपर्क विभाग की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दावोस में झारखंड 'प्रकृति के साथ सामंजस्य और विकास' की अवधारणा के साथ खुद को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा। विभिन्न सत्रों में प्रतिनिधिमंडल निवेश, खनिज संसाधन, औद्योगिक ढांचा, ऊर्जा संक्रमण, पर्यटन और सतत विकास जैसे विषयों पर संवाद करेगा। इसके साथ-साथ झारखंड की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को वैश्विक समुदाय के सामने रखा जाएगा।
बता दें कि झारखंड के सिंहभूम, हजारीबाग और आसपास के क्षेत्रों में फैली मेगालिथिक संरचनाएं न केवल ऐतिहासिक महत्व रखती हैं, बल्कि सूर्य की गति, दिन-रात की अवधि और खगोलीय घटनाओं से भी जुड़ी मानी जाती हैं। हजारीबाग के पकरी बरवाडीह क्षेत्र में मौजूद महापाषाण संरचनाओं की तुलना यूनाइटेड किंगडम के स्टोनहेंज जैसे प्रसिद्ध स्थलों से की जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये स्थल मानव सभ्यता की उस साझा समझ को दर्शाते हैं, जिसमें समय, प्रकृति और ब्रह्मांड को पत्थरों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया। यूके दौरे के दौरान मुख्यमंत्री लंदन और ऑक्सफोर्ड में निवेश और नीति सहयोग से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेंगे। वे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ब्लावाटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में विशेष व्याख्यान और संवाद सत्र को भी संबोधित करेंगे।
सरकार का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय दौरा झारखंड की आर्थिक संभावनाओं के साथ-साथ उसकी प्राचीन मेगालिथिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।