पश्चिम एशिया संकट: सुरजेवाला ने राज्यसभा में स्थगन प्रस्ताव दिया, भारत पर असर पर तुरंत चर्चा का आह्वान

पश्चिम एशिया संघर्ष पर तुरंत चर्चा के लिए कांग्रेस सांसद सुरेजवाला ने राज्यसभा में दिया स्थगन प्रस्ताव


नई दिल्ली, 9 मार्च। संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हो रहा है। पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष के बीच कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरेजवाला ने बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन राज्यसभा में स्थगन प्रस्ताव किया है। उन्होंने तनाव से भारत पर पड़ने वाले असर पर तुरंत चर्चा की मांग की है।

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को राज्यसभा के 'रूल्स ऑफ प्रोसीजर एंड कंडक्ट ऑफ बिजनेस' 267 के तहत स्थगन प्रस्ताव दिया है।

नोटिस में कहा गया है, "यह सदन शून्यकाल, प्रश्नकाल और उस दिन के अन्य सूचीबद्ध कार्यवाहियों को निलंबित कर पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रम और तनावों के भारत पर पड़ने वाले प्रभावों पर तत्काल चर्चा करने का निर्णय ले। क्षेत्र की वर्तमान स्थिति भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं, रणनीतिक साझेदारियों, आर्थिक हितों और वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों के कल्याण पर प्रभाव डाल सकती है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए इस मामले पर सदन में तुरंत चर्चा की जरूरत है।"

सुरजेवाला ने कांग्रेस पार्लियामेंट्री स्ट्रेटेजी कमेटी की बैठक में तय रणनीति के अनुसार यह नोटिस दिया है। कांग्रेस के प्रभारी महासचिव नासिर हुसैन के अनुसार, कांग्रेस पार्लियामेंट्री स्ट्रेटेजी कमेटी की बैठक में रविवार को तय किया गया कि बजट सत्र के दूसरे चरण में अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को उठाया जाएगा और पश्चिमी एशिया में जारी संकट का हमारे देश पर क्या असर होगा, इस पर भी चर्चा होगी। नासिर हुसैन के अनुसार, कांग्रेस संसद में इंडो-यूएस ट्रेड डील के मुद्दे को भी उठाएगी।

दूसरी ओर, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव को लेकर भी फैसला लिया जा सकता है। कांग्रेस की ओर से बजट सत्र के पहले चरण के दौरान स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दिया गया था। कांग्रेस के अनुसार, इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) समेत कई विपक्षी दलों ने इसका समर्थन किया है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने अब तक इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार उन्हें सदन में जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने का अवसर नहीं दिया। इसके चलते ही उन्हें लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का कदम उठाना पड़ा।
 

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