दक्षिण कोरिया ने रिफाइनरी कंपनियों से कहा: बढ़ती तेल कीमतों का पूरा बोझ जनता पर न डालें

दक्षिण कोरिया ने रिफाइनरी कंपनियों से की अत्यधिक कीमतें बढ़ाने से बचने की अपील


सियोल, 9 मार्च। दक्षिण कोरिया के उद्योग मंत्री किम जंग क्वान ने सोमवार को प्रमुख तेल रिफाइनरी कंपनियों से अपील की कि वे कीमतों में अत्यधिक बढ़ोतरी करने से बचें। यह अपील हाल ही में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी के बीच की गई है, जो मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति के कारण हुई है।

किम जंग क्वान ने कहा, “हम चाहते हैं कि पेट्रोलियम की कीमतें पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से तय की जाएं, ताकि मध्य पूर्व की हालिया स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में हुई बढ़ोतरी का पूरा बोझ एकतरफा या अत्यधिक रूप से उपभोक्ताओं पर न डाला जाए।”

यह बयान उन्होंने सियोल में तेल रिफाइनरी उद्योग के प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों के साथ हुई बैठक में दिया। यह जानकारी उद्योग, व्यापार और संसाधन मंत्रालय ने दी।

बैठक में प्रमुख तेल कंपनियों एसके एनर्जी, जीएस कैलटेक्स, एस ऑयल और एचडी हुंडई ऑयल बैंक के अधिकारी शामिल हुए। यह जानकारी योनहेप न्यूज एजेंसी ने दी।

किम ने बताया कि आम तौर पर घरेलू ईंधन कीमतों में वैश्विक तेल कीमतों के बदलाव का असर लगभग दो सप्ताह बाद दिखाई देता है, लेकिन पिछले सप्ताह अमेरिका व इजरायल द्वारा ईरान पर हवाई हमले शुरू करने के बाद यहां कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं।

उद्योग मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि कोई कंपनी अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में बढ़ोतरी का फायदा उठाकर लोगों के जीवन को स्थिर रखने के प्रयासों को कमजोर करती हैं, तो सरकार इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देगी।

कोरिया नेशनल ऑयल कार्पोरेशन के आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार को सियोल में पेट्रोल की औसत कीमत लगभग चार साल में पहली बार 1,900 वॉन (करीब 1.28 डॉलर) प्रति लीटर से ऊपर चली गई। रविवार तक यह और बढ़कर 1,945 वॉन प्रति लीटर हो गई।

जनता की आलोचना के बीच कोरिया ऑयल स्टेशन एसोसिएशन ने पहले कहा था कि घरेलू ईंधन कीमतों में हालिया बढ़ोतरी का मुख्य कारण तेल रिफाइनरी कंपनियों द्वारा आपूर्ति कीमतों में वृद्धि है।

सरकार ने पिछले सप्ताह संभावित संसाधन संकट को देखते हुए एहतियाती चेतावनी जारी की थी, ताकि मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता के बीच ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव से निपटा जा सके।

इसके तहत सरकार मध्य पूर्व के अलावा अन्य क्षेत्रों से अतिरिक्त तेल आपूर्ति सुनिश्चित करने और जरूरत पड़ने पर तेल भंडार जारी करने की योजना भी तैयार कर रही है।

सरकार ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी अनुचित बाजार गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई भी कर रही है और लगभग 30 वर्षों में पहली बार तेल की कीमतों पर सीमा (प्राइस कैप) लगाने की संभावना पर भी विचार कर रही है।
 

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