मेरी गुरु लता दीदी! श्रेया घोषाल ने बताया कैसे उनके गाने सुनकर संगीत सीखा, भावुक हुईं

बचपन से ही मैंने लता मंगेशकर के गाने सुनकर संगीत सीखा है - श्रेया घोषाल


मुंबई, 8 मार्च। भारतीय संगीत की दुनिया में कुछ आवाजें ऐसी होती हैं जिन्हें भुला पाना मुश्किल है। ऐसी ही एक अमर आवाज है लता मंगेश्कर की, जिन्हें लोग प्यार से लता दीदी कहते थे। उनकी सुरीली आवाज में गाए गए हजारों गीत आज भी लोगों की यादों का हिस्सा हैं। हाल ही में मुंबई में आयोजित एक खास संगीत कार्यक्रम में मशहूर गायिका श्रेया घोषाल ने भी लता मंगेशकर को भावुक श्रद्धांजलि दी।

इस कार्यक्रम का नाम 'लेटर्स टू लता दीदी' रखा गया था, जहां कलाकारों और संगीत प्रेमियों ने मिलकर महान गायिका की विरासत को याद किया। इस खास कार्यक्रम में श्रेया घोषाल ने अपने शानदार प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने लता मंगेशकर के गानों पर परफॉर्म किया और उनके प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया।

कार्यक्रम के दौरान श्रेया ने कहा, ''लता मंगेशकर महान गायिका थीं। वह एक भावना हैं जो हर गायक और हर संगीत प्रेमी के दिल में बसती हैं। उनकी आवाज ने अनगिनत कलाकारों को प्रेरित किया है और उनका संगीत आने वाले समय में भी कलाकारों का मार्गदर्शन करता रहेगा।''

श्रेया घोषाल ने कहा, '''लेटर्स टू लता दीदी' जैसे कार्यक्रम का हिस्सा बनना मेरे लिए बहुत खास अनुभव है। बचपन से ही मैंने लता मंगेशकर के गाने सुनकर संगीत सीखा है। मेरे लिए लता दीदी सिर्फ एक सिंगर नहीं बल्कि एक मार्गदर्शक की तरह रही हैं। उनकी आवाज इतनी मधुर और भावपूर्ण थी कि हर कलाकार उनके गीतों से कुछ न कुछ सीख सकता है। यही कारण है कि दुनियाभर के कई गायक उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।''

इस कार्यक्रम में श्रेया घोषाल के अलावा मशहूर गायक जावेद अली ने भी अपनी शानदार प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। जावेद अली ने कई पुराने और लोकप्रिय गीत गाए, जिनमें 'वो हैं जरा', 'ये दिल तुम बिन', और 'एहसान तेरा' जैसे क्लासिक गीत शामिल थे। उनके इन गीतों ने दर्शकों को पुराने सुनहरे दौर की याद दिला दी। पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल भावनाओं और संगीत से भरा हुआ नजर आया, जहां हर कोई लता मंगेशकर की यादों में डूबा दिखाई दिया।
 

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