डॉ. जितेंद्र सिंह: जम्मू-कश्मीर के युवाओं में बढ़ा आत्मविश्वास, खेलों में सिफारिश खत्म, अब केवल प्रतिभा को मिलेगा मौका

खेलों में सिफारिश की संस्कृति को समाप्त करने के लिए प्रयास जारी: डॉ. जितेंद्र सिंह


श्रीनगर, 8 मार्च। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि मोदी सरकार के तहत अवसरों के लोकतंत्रीकरण और सुलभ रास्तों के कारण जम्मू और कश्मीर में युवाओं के बीच आकांक्षाओं का उभार और आत्मविश्वास का नया दौर देखने को मिल रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह अपने आवास पर जम्मू और कश्मीर क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों के सम्मान में आयोजित भोज के अवसर पर बोल रहे थे, जिन्होंने रणजी ट्रॉफी में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था। उन्होंने इस उपलब्धि को केंद्र शासित प्रदेश के युवाओं में बढ़ते आत्मविश्वास और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब बताया।

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, देश भर के युवाओं को अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने और अपनी क्षमता को साकार करने के लिए समान अवसर प्रदान करने हेतु निरंतर प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि खेलों में सिफारिश की संस्कृति को समाप्त करने के लिए कड़े प्रयास किए गए हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हालांकि पूर्व संवैधानिक ढांचे के कारण जम्मू और कश्मीर में सुधार की प्रक्रिया शुरू होने में कुछ समय लगा, लेकिन अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद परिवर्तनकारी बदलावों में तेजी आई। इन सुधारों के बाद, केंद्र शासित प्रदेश ने देश के अन्य राज्यों के समान शासन और भर्ती प्रथाओं को अपनाना शुरू कर दिया।

मंत्री ने कहा कि लागू किए गए प्रमुख सुधारों में से एक भर्ती प्रक्रियाओं में साक्षात्कार के घटक को समाप्त करना था, जिससे चयन में पारदर्शिता और निष्पक्षता में काफी सुधार हुआ है।

इसके परिणामस्वरूप, उन्होंने कहा, केंद्र शासित प्रदेश के सबसे दूरदराज के हिस्सों से भी युवा लड़के और लड़कियों को अब उन नौकरियों के लिए चुना जा रहा है, जिन्हें पहले व्यापक रूप से केवल प्रभावशाली या कुलीन परिवारों से संबंधित लोगों के लिए ही सुलभ माना जाता था।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस परिवर्तन को स्पष्ट करने के लिए हाल ही का एक उदाहरण दिया। हाल ही में घोषित सिविल सेवा परिणामों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि कश्मीर घाटी के एक दृष्टिबाधित उम्मीदवार, जो एक मजदूर के बेटे हैं, ने सिविल सेवाओं में सफलता प्राप्त की है।

उन्होंने कहा कि पहले यह धारणा व्यापक थी कि केवल प्रभावशाली पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार या महंगे कोचिंग संस्थानों तक पहुंच रखने वाले ही ऐसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो सकते हैं। हालांकि, हाल के परिणाम दर्शाते हैं कि योग्यता और दृढ़ संकल्प अब सफलता के निर्णायक कारक के रूप में उभर रहे हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि निष्पक्षता और पारदर्शिता की यही भावना खेलों के क्षेत्र में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया कि खेलों में निष्पक्ष और योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद, केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभाशाली लड़के-लड़कियों को अब विभिन्न खेल विधाओं में जम्मू और कश्मीर का प्रतिनिधित्व करने के अवसर मिल रहे हैं।

क्रिकेट का विशेष रूप से जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि रणजी ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर टीम का प्रदर्शन इस बदलाव का एक सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिताओं में जम्मू-कश्मीर टीम को गंभीरता से नहीं लिया जाता था। हालांकि, अब टीम ने भारतीय घरेलू क्रिकेट की सबसे मजबूत टीमों में से एक, कर्नाटक टीम को हराकर अपनी मजबूत छाप छोड़ी है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं में एक नया आत्मविश्वास और दृढ़ विश्वास जगाया है कि वे भी देश की सर्वश्रेष्ठ टीमों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं और सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि युवाओं में विश्वास और आकांक्षा की यह भावना लोकतंत्र के सच्चे सार को दर्शाती है, जहां प्रत्येक बच्चे को, पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना, कड़ी मेहनत और समर्पण के माध्यम से सफलता प्राप्त करने का अवसर और आत्मविश्वास मिलता है।

सरकारी रोजगार से परे उभरते अवसरों पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू और कश्मीर में बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हालांकि केंद्र शासित प्रदेश ने अन्य क्षेत्रों की तुलना में स्टार्टअप क्षेत्र में देर से प्रवेश किया है, लेकिन इसने लैवेंडर आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देकर पहले ही एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि लैवेंडर की खेती और अरोमा मिशन जैसी पहलों के तहत विकसित संबंधित स्टार्टअप्स ने जम्मू और कश्मीर के ग्रामीण युवाओं के लिए नए आर्थिक अवसर खोल दिए हैं। उन्होंने कहा कि दूरदराज के गांवों के लड़के-लड़कियां अब लैवेंडर की खेती और मूल्यवर्धित उत्पादों के माध्यम से सम्मानजनक आय अर्जित कर रहे हैं, जिससे सरकारी रोजगार पर निर्भरता कम हो रही है और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिल रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आगे कहा कि जम्मू और कश्मीर में लैवेंडर स्टार्टअप की सफलता का अनुकरण अब कई अन्य राज्यों द्वारा किया जा रहा है, विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों द्वारा, जो ग्रामीण युवाओं को सशक्त बनाने के लिए इसी तरह के मॉडल तलाश रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस तरह के घटनाक्रम धीरे-धीरे युवाओं की मानसिकता में बदलाव ला रहे हैं, जो तेजी से यह महसूस कर रहे हैं कि समर्पण, एकाग्रता और कड़ी मेहनत से वे कई क्षेत्रों में सफल करियर बना सकते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने जम्मू और कश्मीर क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों को बधाई दी और कहा कि उनकी सफलता इस क्षेत्र के कई और युवा खिलाड़ियों को उच्चतम स्तर पर खेल में अपना करियर बनाने के लिए प्रेरित करेगी।

उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि जम्मू और कश्मीर के युवा खेल, प्रशासन, उद्यमिता और नवाचार सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना जारी रखेंगे, जिससे प्रगतिशील और विकसित भारत की व्यापक दृष्टि में योगदान मिलेगा।

सम्मान समारोह का समापन खिलाड़ियों को उनकी उत्कृष्ट प्रदर्शन और जम्मू और कश्मीर की खेल पहचान को बढ़ाने में उनके योगदान के लिए स्मृति चिन्ह भेंट करने के साथ हुआ।

इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) उप-समिति के प्रशासनिक सदस्य, ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (सेवानिवृत्त); जम्मू-कश्मीर की वरिष्ठ पुरुष टीम के मुख्य कोच, अजय शर्मा और जम्मू-कश्मीर रणजी टीम के कप्तान, पारस डोगरा भी उपस्थित थे।
 

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