काबुल, 8 मार्च। ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष का असर अन्य देशों पर भी दिखने लगा है। पाकिस्तान के बलूचिस्तान के कई हिस्सों में ईंधन और खाद्य आपूर्ति बाधित हो गई है। कीमतों में बढ़त और सीमावर्ती क्षेत्रों में कमी का डर सता रहा है।
स्थानीय मीडिया के अनुसार पाकिस्तान के ईरान सीमा से लगे क्षेत्रों खासकर मकरान और रक्साना इलाके जिनमें ग्वादर, केच, पंजगुर, चागई और वाशुक में बड़ी मात्रा में ईरानी सामान पर निर्भरता है। ये सामान पाकिस्तान के अन्य हिस्सों से आने वाले सामान की तुलना में सस्ते और आसानी से उपलब्ध होते हैं।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सीमा बंद होने और ईरान की ओर से निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति काफी कम हो गई है।
मकरान ट्रेडर्स अलायंस के अध्यक्ष इशाक रोशन दाश्ती ने बताया कि सीमावर्ती इलाकों में इस्तेमाल होने वाला लगभग 80 प्रतिशत ईंधन और खाद्य सामग्री ईरान से आती है।
उन्होंने कहा कि इस साल की शुरुआत में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद ईरान ने खाद्य वस्तुओं के निर्यात पर 30 प्रतिशत से अधिक कर लगा दिया, जिससे ईरानी सामान पहले ही महंगा हो गया था।
दशती ने कहा, "जब से जंग शुरू हुई है, बॉर्डर पर ट्रेड लगभग बंद हो गया है।" ईरानी सरकार ने खाने की चीजों के निर्यातकों पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है, जिससे आटा, खाना पकाने का तेल, दूध, दही, एलपीजी गैस, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई में रुकावट आ रही है।
स्थानीय बाजारों में कमी के संकेत दिखने लगे हैं और जिन दुकानदारों के पास अभी स्टॉक है वे उच्च कीमतों पर सामान बेच रहे हैं। तटीय जिलों ग्वादर, जिवानी, पासनी और ओरमारा में खाद्य वस्तुओं की कीमतें 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।
मशकेल भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहा है। लोकल ट्रेडर खुदा दाद ने कहा कि मशकेल पहले से ईरानी प्रोडक्ट्स पर निर्भर रहा है क्योंकि पाकिस्तान के दूसरे इलाकों से उसकी ठीक से रोड कनेक्टिविटी नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले हफ़्ते ज़्यादातर चीज़ों की कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं।
द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार एलपीजी गैस की कीमत दोगुनी होकर 600 पाकिस्तानी रुपए (पीकेआर) प्रति किलो हो गई है जबकि डीजल और कुकिंग ऑयल की कीमत 60 से 70 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर ग्वादर के मछली पकड़ने के उद्योग पर भी पड़ रहा है क्योंकि वहां बड़ी संख्या में लोग इसी क्षेत्र से अपनी आजीविका कमाते हैं।
पश्चिम एशिया में यह संघर्ष तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए, जिनका उद्देश्य तेहरान की मिसाइल क्षमताओं और सैन्य ढांचे को कमजोर करना है।
इस अभियान की पहली लहर में ईरानी नेतृत्व के कई वरिष्ठ लोग मारे गए जिनमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल बताए गए। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिनसे अमेरिकी ठिकानों, क्षेत्रीय राजधानियों और सहयोगी बलों को निशाना बनाया गया।