भारती-नारी सम्मेलन: डॉ. महेश का मंत्र- 'शक्ति का मतलब योद्धा भावना', 'भारती शक्ति' महिलाओं को बनाएगी सशक्त

'शक्ति का मतलब योद्धा भावना,' डॉ. एस. महेश ने बताया मार्शल आर्ट का महत्व


नई दिल्ली, 8 मार्च। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर विज्ञान भवन में महिला विचारकों का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 'भारती-नारी से नारायणी' आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में रविवार को आध्यात्मिक हस्तियों ने भी शिरकत की। राष्ट्रीय महिला सम्मेलन में महिला सशक्तीकरण के मुद्दों पर बात सभी वक्ताओं ने बातचीत की।

गुरुक्कल डॉ. एस. महेश ने कहा कि महिलाओं को आत्मरक्षा और आत्मविश्वास से मजबूत बनाने के उद्देश्य से मार्शल आर्ट के क्षेत्र में एक खास पहल की जा रही है। डॉ. एस. महेश (जो पारंपरिक मार्शल आर्ट कलारिपयाट्टू के विशेषज्ञ हैं) ने कहा कि भारत में लड़कियों को आत्मरक्षा कौशल सिखाने के लिए 'भारती शक्ति' नाम से एक अभियान चलाया जा रहा है।

डॉ. एस. महेश ने आईएएनएस से बताया कि वे केरल के तिरुवनंतपुरम से हैं और दुनिया की सबसे प्राचीन संगठित मार्शल आर्ट परंपराओं में से एक, कलारीपयट्टू का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि यह कला दुनिया की कई मार्शल आर्ट शैलियों की 'मां' मानी जाती है।

उन्होंने यह भी बताया कि वह अगस्त्यम कलारी परंपरा के पांचवीं पीढ़ी के गुरुकुल से जुड़े हुए हैं और लंबे समय से इस प्राचीन कला को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

डॉ. महेश ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए मार्शल आर्ट बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि जब हम 'शक्ति' की बात करते हैं, तो उसका अर्थ केवल ताकत नहीं, बल्कि भीतर की वह ऊर्जा है जो योद्धा की भावना से आती है।

उनके अनुसार आज के समय में समाज में 'योद्धा भावना' काफी हद तक कम हो गई है। उन्होंने कहा कि योद्धा केवल वह नहीं होता जो लड़ाई करता है, बल्कि वह व्यक्ति, चाहे पुरुष हो या महिला, जो समाज के लिए खड़ा होता है, समाज की रक्षा करता है और लोगों की जिम्मेदारी निभाता है।

डॉ. महेश ने कहा कि इस योद्धा भावना को फिर से जगाने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से उन्होंने 'भारती शक्ति' नाम से एक आंदोलन शुरू किया है, जिसके तहत लड़कियों को कलारीपयट्टू मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण दिया जाता है।

उन्होंने बताया कि इस पहल के जरिए अब तक करीब 15,000 लड़कियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल आत्मरक्षा सिखाना नहीं है, बल्कि लड़कियों में आत्मविश्वास, अनुशासन और साहस की भावना विकसित करना भी है।

डॉ. महेश ने कहा कि अगर भारत में लड़कियां शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनती हैं, तो इससे न सिर्फ उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि समाज भी अधिक सुरक्षित और सशक्त बनेगा।
 

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