अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: 'भारती नारी से नारायणी' सम्मेलन में देशभर से उमड़ी महिलाओं ने भरी सशक्तिकरण की हुंकार

'भारती नारी से नारायणी' राष्ट्रीय सम्मेलन में महिला सशक्तीकरण पर हुई व्यापक चर्चा


नई दिल्ली, 8 मार्च। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दिल्ली में 'भारती नारी से नारायणी' कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में देशभर से आई महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सांसदों, आध्यात्मिक गुरुओं और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का उद्देश्य महिलाओं की शक्ति, उनकी भूमिका और समाज में उनके बढ़ते योगदान पर चर्चा करना था।

इस मौके पर भारत की राजदूत और संयुक्त राष्ट्र की पूर्व सहायक महासचिव लक्ष्मी पुरी ने सभी महिलाओं और लड़कियों को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आईएएनएस से कहा कि उन्हें इस सम्मेलन में शामिल होकर बहुत खुशी और गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने बताया कि यह अपने तरह का पहला ऐसा सम्मेलन है, जिसमें भारत के अलग-अलग हिस्सों से महिलाएं और लड़कियां एक साथ आई हैं। ऐसे मंच महिलाओं को अपनी बात रखने और एक-दूसरे से सीखने का अवसर देते हैं।

वहीं राज्यसभा सदस्य रेखा शर्मा ने भी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बहुत व्यवस्थित तरीके से आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन आयोजनों में महिलाएं अपने परिवारों के साथ शामिल हो रही हैं, जिससे एक सकारात्मक माहौल बन रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यहां महिला सांसदों और नेताओं को भी चर्चा में शामिल किया जा रहा है और उन्हें भी ऐसी ही एक चर्चा में भाग लेने का अवसर मिला।

सम्मेलन में शामिल व्यवसायी शशि बुवना ने कहा कि हर महिला अपने जीवन में अलग-अलग परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करती है, चाहे वह किसी निम्न आय वर्ग से हो, मध्यम वर्ग से हो या फिर उच्च वर्ग से। उनके अनुसार इस सम्मेलन की खास बात यह है कि यहां समाज के हर वर्ग की महिलाएं एक साथ आई हैं और अपने अनुभव साझा कर रही हैं।

कार्यक्रम में मौजूद आध्यात्मिक नेता दया शंकर ने महिलाओं की शक्ति और उनके ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सृष्टि के आरंभ में परम पिता परमात्मा ने चारों वेदों का ज्ञान दिया था और वेदों में कई ऋषिकाओं का जिक्र मिलता है, जिन्होंने मंत्रों के द्रष्टा के रूप में काम किया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया की नींव हमेशा से मातृशक्ति को ही माना गया है।

इस अवसर पर भाजपा सांसद सुमित्रा बाल्मिक ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर विज्ञान भवन में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और राष्ट्र सेविका समिति की निदेशक वी. शांता अक्का ने मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में महिलाओं ने देश की सांस्कृतिक, राष्ट्रीय, राजनीतिक और पारंपरिक विरासत को सामने रखा और उसे गर्व के साथ अपनाया।

भाजपा सांसद संध्या वर्मा ने भी देश की सभी माताओं, बहनों और महिलाओं को महिला दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 'नारी से नारायणी' का विषय देश में महिलाओं की बढ़ती शक्ति और सशक्तीकरण को दर्शाता है। आज भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं।

भाजपा के राज्यसभा सदस्य कविता पाटीदार ने इस आयोजन के लिए राष्ट्र सेविका समिति की सराहना की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित यह दो दिवसीय कार्यक्रम भारतीय महिलाओं की शक्ति को दिखाता है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के प्रधानमंत्री द्वारा महिलाओं को अधिकार और सम्मान देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं और इसका सकारात्मक असर समाज में दिखाई दे रहा है।

प्रमुख आध्यात्मिक गुरु आनंदमूर्ति गुरूमा ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में हर दिन महिलाओं के सम्मान का दिन माना जाता है। उन्होंने कहा कि खास तौर पर नवरात्रि का पर्व साल में दो बार मनाया जाता है, जो देवी शक्ति की आराधना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हालांकि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस जैसे अवसर भी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति में महिलाओं का सम्मान हमेशा से रहा है।

वहीं योगिनी मुक्ति नाथ ने कहा कि भारतीय महिला सिर्फ बच्चे को जन्म ही नहीं देती, बल्कि उसे भारतीय संस्कारों के अनुसार पालती-पोसती और सही दिशा भी देती है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में यह माना जाता है कि बच्चे के जन्म के दिन ही ईश्वर उसके भाग्य को लिख देते हैं।
 

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