ईरानी नाविकों पर अमेरिकी दबाव के बावजूद श्रीलंका अडिग, विदेश मंत्री हेराथ बोले - अंतर्राष्ट्रीय कानून ही सर्वोपरि

Herath


नई दिल्ली, 7 मार्च। श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने कहा है कि वह ईरानी नाविकों से अंतर्राष्ट्रीय कानून के हिसाब से पेश आएंगे। उन्होंने टॉरपीडो वाले फ्रिगेट से बचाए गए ईरानी नाविकों को लेकर ये बयान दिया। यह बात ऐसी खबरों के बाद कही गई जिसमें वाशिंगटन कोलंबो पर उन्हें वापस न भेजने का दबाव डाल रहा है।

विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने नई दिल्ली में एक कॉन्फ्रेंस में कहा कि श्रीलंका, कोलंबो की इंटरनेशनल ट्रीटी की शर्तों के तहत ईरानी फ्रिगेट आईआरआईएस डेना के 32 नाविकों की देखभाल कर रहा है।

बुधवार को श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास एक यूएस सबमरीन ने फ्रिगेट को डुबो दिया था। श्रीलंका ने हमले के बाद नाविकों को बचाने के लिए अपनी नौसेना भेजी थी।

यह पूछे जाने पर कि क्या ईरानियों को कोलंबो में न रखने के लिए यूएस ने दबाव डाला था, हेराथ ने कहा, "हमने इंटरनेशनल कानूनों के हिसाब से सभी कदम उठाए हैं।"

4 मार्च को हिंद महासागर में युद्धपोत आईआरआईएस डेना को अमेरिका ने हमला कर डुबो दिया था। इसके बाद ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने इसे समुद्र में अमेरिका की बर्बरता करार दिया था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, 'फ्रीगेट डेना, जो भारत की नौसेना का मेहमान जहाज था और जिसमें लगभग 130 नाविक थे, वो बिना किसी चेतावनी के इंटरनेशनल पानी में टकरा गया। मेरे शब्द याद रखना, अमेरिका को अपनी बनाई मिसाल पर बहुत पछतावा होगा।'

ये जहाज भारत के साथ एक युद्धाभ्यास से वापस लौट रहा था, जब इस पर हमला किया गया था।

श्रीलंका ने दूसरे ईरानी वॉरशिप, आईआरआईएस बुशहर को भी सुरक्षित जगह दी और डेना पर टॉरपीडो लगने के एक दिन बाद उसके 219 क्रू मेंबर्स को बचाया था। इंजन में समस्या की सूचना मिलने के बाद जहाज को श्रीलंका के उत्तर-पूर्वी तट पर त्रिंकोमाली ले जाया गया था।
 

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