नई दिल्ली, 7 मार्च। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिला बुद्धिजीवियों के राष्ट्रीय सम्मेलन 'भारती-नारी से नारायणी' समारोह में शामिल हुई। इस कार्यक्रम में उन्होंने महिलाओं के योगदान, साहस और बलिदान को सलाम किया। साथ ही, उन्होंने महिलाओं के लंबे संघर्ष और राष्ट्रीय स्वयं सेविका समिति की बहनों को भी नमन किया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए रेखा गुप्ता ने कहा, "महिलाएं सिर्फ परंपराओं की रखवाली नहीं करतीं, बल्कि समाज में बदलाव भी लाती हैं। आज यहां पर मौजूद महिलाओं को देखकर बदलाव साफ नजर आ रहा है। पहले जहां ज्यादातर कार्यक्रमों में पुरुषों का नेतृत्व होता था, हॉल में ग्रे, काले या नीले कोट-पैंट और शर्ट वाले लोग दिखते थे, लेकिन आज का माहौल पूरी तरह से अलग है क्योंकि जहां पर महिलाएं होती हैं, वहां का माहौल पूरी तरह से बदल जाता है और रंगों से भर जाता है।"
उन्होंने आगे महिलाओं की ऊर्जा और व्यक्तित्व की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, "महिलाएं अपनी मुस्कान, सहनशीलता और अलग-अलग गुणों से समाज को रंगीन बना देती हैं। कई लोग मुझसे पूछते हैं कि एक महिला होने के नाते आपको पुरुषों के सामने बोलने और खुद को हर बार साबित करना कितना मुश्किल होता है, तो मैंने इसका जवाब देते हुए कहा कि काबिलियत का कोई जेंडर नहीं होता। जब कोई महिला अपनी योग्यता और गुणों के साथ आगे बढ़ती है, तो उसे कोई नहीं रोक सकता। आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं और कई जगहों पर पुरुषों से भी बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।"
मुख्यमंत्री ने भारत की नारी की लंबी यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस सफर में कई समाज सुधारकों, संगठनों और सरकारों ने भी अहम भूमिका अदा की है। उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर बनी फिल्म 'शतक' ने राष्ट्रीय स्वयं सेविका समिति की संस्थापक आदर्श लक्ष्मी बाई केलकर का भी जिक्र किया था कि कैसे उन्होंने महिलाओं को संगठित किया, कई बहनों को जोड़ा और उन्हें यह समझाया कि परिवार के साथ-साथ राष्ट्र के लिए भी कुछ करना जरूरी है।"
अपनी बात को खत्म करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राष्ट्रीय स्वयं स्वयंसेविकाओं को प्रणाम किया और कहा कि इन बहनों ने लंबी यात्रा में सभी महिलाओं को सही मार्गदर्शन दिया और उन्हें राष्ट्रसेवा का महत्व समझाया।