तीसरी पीढ़ी के फायर एंड फॉरगेट श्रेणी के मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का टॉप अटैक क्षमता के साथ परीक्षण किया गया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के मुताबिक सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण एक मूविंग टारगेट पर किया है।
यह मिसाइल ट्राइपॉड या सैन्य वाहन-आधारित लॉन्चर से प्रक्षेपित की जा सकती है, जिससे इसकी तैनाती और उपयोग में लचीलापन बढ़ता है। यह परीक्षण महाराष्ट्र के अहिल्या नगर स्थित केके रेंज में किया गया।
इस स्वदेशी मिसाइल का परीक्षण डीआरडीओ की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेटरी (डीआरडीएल), हैदराबाद द्वारा किया गया है।
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह अत्याधुनिक मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम) पूर्णत स्वदेशी तकनीकों से युक्त है। इनमें इमेजिंग इंफ्रारेड, होमिंग सीकर, ऑल-इलेक्ट्रिक कंट्रोल एक्टुएशन सिस्टम, फायर कंट्रोल सिस्टम, टैंडम वारहेड, प्रोपल्शन सिस्टम तथा उच्च प्रदर्शन दृष्टि प्रणाली शामिल हैं।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इन प्रमुख उप-प्रणालियों का विकास डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं द्वारा किया गया है। इन प्रयोगशालाओं में रिसर्च सेंटर इमारत (हैदराबाद), टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी (चंडीगढ़), हाई एनर्जी मैटीरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी (पुणे) और इंस्ट्रूमेंट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (देहरादून) शामिल हैं।
परीक्षण के दौरान एक टैंक को लक्ष्य बनाया गया। टैंक का अनुकरण करने के लिए डिफेंस लैबोरेटरी, जोधपुर द्वारा विकसित किए गए थर्मल टार्गेट सिस्टम का उपयोग किया गया। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि मिसाइल का इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर दिन और रात व दोनों परिस्थितियों में प्रभावी युद्ध संचालन में सक्षम है। इसका टैंडम वारहेड आधुनिक मुख्य युद्धक टैंकों को निष्प्रभावी करने की क्षमता रखता है।
भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड इस हथियार प्रणाली के डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर्स हैं। ये दोनों संस्थान इसके उत्पादन और आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर डीआरडीओ, डीसीपीपी साझेदारों और उद्योग जगत को बधाई दी है। रक्षा मंत्री ने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। वहीं, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि परीक्षण में लक्ष्य की सफलता के साथ यह हथियार प्रणाली भारतीय सेना में शामिल किए जाने की दिशा में एक अहम कदम है।