केरल: सीएम विजयन को झटका, सीएटी ने आईएएस के ट्रांसफर ऑर्डर रद्द किए

सीएम विजयन को झटका, सीएटी ने आईएएस के ट्रांसफर ऑर्डर रद्द किए


तिरुवनंतपुरम, 6 मार्च। केरल सरकार को बड़ा झटका देते हुए सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (सीएटी) ने शुक्रवार को तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों से जुड़े ट्रांसफर आदेश रद्द कर दिए और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि भविष्य में पोस्टिंग और ट्रांसफर करते समय 2014 के आईएएस कैडर नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए।

यह फैसला आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन की याचिका पर आया, जिसमें सरकार द्वारा कुछ ट्रांसफर और नियुक्तियों को चुनौती दी गई थी। ट्रिब्यूनल ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बी. अशोक कुमार समेत तीन ट्रांसफर आदेश रद्द करते हुए कहा कि कैडर नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था।

एक अहम टिप्पणी में ट्रिब्यूनल ने वर्तमान एक्साइज कमिश्नर एमआर अजित कुमार की नियुक्ति को भी गैर-कानूनी घोषित किया। उन्होंने कहा कि एक्साइज कमिश्नर का पद केवल आईएएस कैडर का पद है और इस पद पर केवल आईएएस अधिकारी ही नियुक्त हो सकते हैं।

अजित कुमार, जो पहले एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस के रूप में काम कर रहे थे, को पुलिस ड्यूटी से हटाकर एक्साइज विभाग में नियुक्त किया गया था। यह नियुक्ति त्रिशूर पूरम में हुई गड़बड़ियों और विधायक पीवी अनवर के खुलासों के बीच हुई विवादों से जुड़ी थी।

ट्रिब्यूनल के आदेश के अनुसार, अजित कुमार एक्साइज कमिश्नर के रूप में कार्य नहीं कर सकते और सरकार को उन्हें पद से हटाना होगा। ट्रिब्यूनल ने आगे स्पष्ट किया कि आईएएस अधिकारियों के लिए तय पदों पर नॉन-कैडर अधिकारियों को नियुक्त करना गैर-कानूनी है। इसमें केरल इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल एडमिनिस्ट्रेशन (केआईएलए) और इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट इन गवर्नमेंट (आईएमजी) के डायरेक्टर पद भी आईएएस कैडर के पद हैं।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि सिविल सर्विस बोर्ड की सिफारिश के बिना और सही कारण बताए बिना किए गए ट्रांसफर को वैध नहीं माना जा सकता। इसके अलावा, ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश की याद दिलाई, जिसमें कहा गया था कि सिविल सर्वेंट्स को किसी भी पोस्ट पर कम से कम दो साल तक रहने का समय मिलना चाहिए।

इस फैसले से उम्मीद है कि राजनीतिक कारणों से अधिकारियों को ट्रांसफर करने और पसंदीदा अधिकारियों को अहम पदों पर नियुक्त करने की प्रथा पर रोक लगेगी। ट्रिब्यूनल ने यह भी जोर दिया कि प्रशासनिक कामकाज में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

यह फैसला राज्य के कई आईएएस अधिकारियों के लिए राहत की खबर है, और इसके चलते आने वाले दिनों में केरल में वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव हो सकते हैं।
 

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